बुधवार, 17 मई 2017

अंग्रेजी मीडियम में पढ़े लिखे लोग भी देखें फिल्म हिंदी मीडियम

सिने पोलिस ( पुराना नाम - फन सिनेमा )अँधेरी वेस्ट, मुंबई ।  प्रेस शो ,मीडिया को समय दिया ७ बजे शाम का , फिल्म शुरू हुई ७ बजकर २५ मिनट पर , छोटे से लेकर बड़े सभी अख़बार , रेडिओ, चैनल पर फिल्म रिव्यु करने वाले फिल्म समीक्षक मौजूद फिल्म #हिंदीमीडियम देखने के लिये। यानि इरफ़ान खान की फिल्म हो और ऐसी भीड़ न हो कैसे हो सकता है। लेकिन #सिनेपोलिस की सर्विस बहुत ही बेक़ार फिल्म शुरू होने से पहले तक उसने मीडिया वालों को पॉप कॉर्न भी नहीं दिये यह कर मना कर दिया कि अभी शुरू नहीं किया है। 
ख़ैर छोड़ो इन सब बातों को हम तो इरफ़ान की फिल्म देखने गये तो देखी भी उस दर्द को भी महसूस किया। आप भी फिल्म देखें और सच में उन माता पिता के दर्द को समझें जो अपने बच्चों का एडमिशन अच्छे स्कूल में कराना चाहते हैं जिससे उनका बच्चा फ़र्राटेदार अँग्रेजी बोल सके क्योंकि अँग्रेजी बोलने वाला ही हिन्दुस्तान में ऊँचे ओहदे पर होता है। 
ऐसी मानसिकता है आज हमारे देश की , हिंदी बोलने वाला जितना भी बुद्धिमान हो लेकिन उसे दोयम दर्जे का नागरिक ही समझा जाता है. हिंदी मीडियम में पढ़ा लिखा राज चाँदनी चौक में बड़ा सा लंहगों और साड़ियों के शो रूम का मालिक अपने बेटी का दिल्ली के सबसे अच्छे स्कूल में एडमिशन कराना चाहता है लेकिन ऐसे स्कूल तो सिर्फ धंधा करते हैं पढ़ाई के नाम पर।  राइट तो एजुकेशन यानि आर टी इ के नाम पर गरीबों को बेवकूफ़ बनाते हैं। स्कूलों का यह व्यापार दिन रात यूं ही फलेगा जब तक  हमारी सरकार , शिक्षा विभाग   स्कूलों के कंधे पर अपना हाथ रखते रहेंगे। 
फिल्म की कहानी अच्छी , अभिनय अच्छा , फिल्म थोड़ी धीमी है लेकिन अच्छा सन्देश मनोरंजन भी भरपूर है।  तो
देखें अंग्रेजी मीडियम में पढ़े लिखे लोग भी फिल्म हिंदी मीडियम।