फिल्म -- रॉ यानि रोमियो अकबर वाल्टर ,५ अप्रैल २०१९ , हैदराबाद के पी वी आर में स्क्रीन - ७ में दोपहर १ बजकर ५ मिनट का शो , दर्शकों की उपस्थिति ५० प्रतिशत। फिल्म "रोमियो अकबर वाल्टर " से बहुत उम्मीदें थी , कारण - क्योंकि यह एक जासूसी थ्रिलर फिल्म है। लेकिन इस फिल्म में तो नाममात्र को भी थ्रिल नहीं है। बहुत ही धीमी फिल्म है , न कोई रोमाँच और न ही कोई ऐसा द्रश्य जिसे देखकर दर्शक दाँतो तले ऊँगली दबाने को मजबूर हो। जबकि आम तौर पर जासूसी फिल्म ऐसी होती है कि देखने वाले अपना दिल संभाल कर फिल्म देखें। इस फिल्म को देखकर देश भक्ति का भी अहसास नहीं होता। आखिरी के दस मिनट में जैसा सस्पेंस देखने को मिला अगर वैसी ही पूरी फिल्म बनती तो यह फिल्म "राजी " के समक्ष होती। लेकिन निर्देशक रॉबी ग्रेवाल ने "राजी " फिल्म से कुछ भी नहीं सीखा।
मौनी को करने जैसा कुछ मिला ही नहीं। जॉन तभी अच्छे लगे जब वो आखिरी नाम वाल्टर का किरदार निभा रहे थे। जॉन का चेहरा भी कुछ अजीब सा हो गया है। फिल्म सच्चे किरदारों पर आधारित थी लेकिन फिल्म में कुछ भी असली और सच्चा दिखाई नहीं दिया।
यह फिल्म "रॉ " अगर दर्शक नहीं देखे तो ज्यादा सुखी रहेगें। जॉन के प्रशंसकों को भी निराशा ही हाथ लगेगी। फिर भी वो देखना चाहें तो देखें लेकिन अपने रिस्क पर।