शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

कई फिल्मों की कहानियों को मिलाकर बना दी फिल्म कट्टी बट्टी

फन सिनेमा, शुक्रवार १८ सितम्बर, सुबह ११-३५ का शो टाइम फिल्म #कट्टीबट्टी , ७० प्रतिशत दर्शक


 बैक तो बैक दो फ़िल्में "हीरो"  और "कट्टी बट्टी"रिलीज़ हुई निर्देशक निखिल अडवाणी की, लेकिन दोनों ही फ़िल्में दर्शकों को रिझाने में कामयाब नही हो पायी। "कट्टी बट्टी" क्या सोच कर बनायी नहीं पता, पुरानी कहानी पुराना संगीत, इमरान को देख कर तो उनकी कई फिल्मों की यादें ताज़ा हो गयी जैसे वो इस फिल्म में कंगना के पीछे भागते रहते हैं वैसे ही वो फिल्म "ब्रेक के बाद" में दीपिका के पीछे भागते थे। पुरानी फिल्मों की तरह इस फिल्म में भी कंगना के लिये उसके बॉय फ्रेंड लड़ते रहते हैं. हैं न कुछ अजीब --- 

रुकी हुई सी फिल्म लगती है "कट्टी बट्टी" जिसमें न रोमांस न इमोशंस न दिल को छूने वाले संवाद, उस पर फिल्म के आखिरी में फिल्म में कुछ नया दिखाने के चक्कर में  हीरोइन को कैंसर।  लेकिन फिर भी शायद ही किसी भी दर्शक का दिल पिघला होगा पायल की बिमारी को देख कर. फिल्म में नायिका को कैंसर की बिमारी है यह नायक को छोड़कर बाकी सबको पता है लेकिन कोई बताता नही यह कुछ अजीब लगता है और जिस तरह से पता चलता है वो ड्रामा भी कुछ अजीब है।   मध्यांतर से पहले की फिल्म फिर भी देखी जा सकती है लेकिन बाद की तो बहुत ही लचर है.  

कुछ नया नही है फिल्म में और पुराना भी ऐसे पेश किया है जैसे देखने में मज़ा नही आ रहा। इमरान को देख कर लगता ही नहीं कि हम उनकी कोई नयी देख रहे हों। कंगना ने जरूर कुछ नया करने की कोशिश की है।

दो गाने "लिप टू लिप दे किसियाँ " और "सौं आँसू" ठीक हैं बाकी बेवजह हैं। कंगना की सफलता और बढ़ती लोकप्रियता शायद बचा पाये इस फिल्म को।  

फिल्म देखें या न देखें आपकी मर्जी है , वैसे मुझे तो लगता है फिल्म देखने से ज्यादा अच्छा है गणपति उत्सव में हिस्सा लेंगें तो आप ज्यादा लुत्फ़ उठा सकेगें। 

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