सोमवार, 12 अक्टूबर 2015

पूरी तरह ऐश की फिल्म है जज़्बा

फिल्म #जज़्बा  १२ अक्टूबर #फन सिनेमा, दोपहर १२ बजकर ४० मिनट का शो, २० प्रतिशत दर्शक।  ९ अक्टूबर को रिलीज़ हुई निर्देशक संजय गुप्ता की फिल्म #जज़्बा ने सप्ताहान्त में १५. २४ करोड़ की कमाई की।  ५ साल के बाद इस फिल्म "जज़्बा" से  अभिनेत्री ऐश्वर्या रॉय बच्चन  दोबारा दर्शकों के सामने आयी।  साउथ कोरियन फिल्म #सेवन डेज की रीमेक यह फिल्म पूरी तरह ऐश की फिल्म है फिल्म के हर सीन में वो दिखाई देती हैं।  
संजय गुप्ता हमेशा एक्शन और थ्रिलर फ़िल्में ही बनाते हैं और उनकी पिछली अधिकतर फ़िल्में किसी न किसी फिल्म का  रीमेक ही रही हैं।  हालांकि फिल्म दर्शकों को आखिरी तक बांधे रखती हैं सस्पेंस भी अच्छा है लेकिन वकील बनी ऐश्वर्या कहीं से भी वकील नही लगती ऐसा लगता है जैसे उन्होंने पुलिस की ट्रेनिंग ले रखी है। फिल्म के एक दृश्य में  जब वो कोर्ट में हैं तो सबसे पहले वो अपने हाई हील शूज़ पहनती हैं इस सीन से  निर्देशक संजय गुप्ता क्या दिखाना चाह रहे थे पता ही नही चला।  इसके अलावा भारतीय कोर्ट में कब से टाइट जींस पहनने लगी महिला वकील। जिस तरह से वो अपनी बेटी के अपहरण कर्ताओं के पीछे भागती हैं  और केस लड़ने के लिये मारपीट भी करती हैं, देखकर अच्छा लगता है। बलात्कार के बाद लड़कियों की हत्या जो कि आज हमारे देश में आम खबर हो गयी है. इस दुर्घटना को भी फिल्म से जोड़ा  गया है।   

 परदे पर जब जब इरफ़ान  आते हैं दर्शकों को अच्छा लगता है।  इरफ़ान सस्पेंड इन्स्पेक्टर होकर भी बहुत मदद करते हैं अपनी दोस्त अनुराधा की, जबकि अपनी कोई मदद नही कर पाते। 

शबाना आज़मी का काम अच्छा है जबकि जैकी श्राफ ने शायद संजय गुप्ता के लिए यह फिल्म की होगी। 
आप चाहे तो ऐश्वर्या के लिये फिल्म #जज़्बा देख सकते हैं। अतुल कुलकर्णी का काम ठीक ठाक है। 


शनिवार, 3 अक्टूबर 2015

फिल्म "सिंह इज़ ब्लिंग " में सिंह ब्लिंग नही हुआ

फिल्म 'सिंह इज़ ब्लिंग" पी वी आर , सिटी मॉल, अँधेरी ( वेस्ट ) मुंबई।  शनिवार , ३ अक्टूबर सुबह ११ बजे का शो , ७० % दर्शक। 

जो गलती निर्देशक प्रभुदेवा ने अपनी पिछली फिल्म "एक्शन जैक्सन " बनाकर की थी वहीं गलती उन्होंने "सिंह इज़ ब्लिंग" फिल्म  बना कर की है।  न तो यह फिल्म रोमांटिक फिल्म है न ही पूरी तरह से कॉमेडी और न ही एक्शन फिल्म है।  पता नही क्या दिखाना चाहते हैं  इस फिल्म में। जब - जब एमी परदे पर आती हैं एक्शन होता है और जब - जब लारा दत्ता आती हैं कॉमेडी होती है प्रभु ने दोनों काम दोनों नायिकाओं से करवा लिये हैं।  अक्षय के काम तो इन दोनों अभिनेत्रयों ने ही कर लिये इसीलिये उनके हिस्से कुछ काम आया नही. सिवाय अपने पिता की डाँट खाने के।  अच्छे अभिनेता होते हुए भी के के मेनन के हिस्से ऐसा काम आया है जो की कोई भी कर सकता था।  संवाद भी पता नहीं कैसे कैसे बुलवाये हैं जो की उन पर बिल्कुल भी सूट नही करते। उनके हेयर स्टाइल की तरह.  

एमी ने अच्छा एक्शन किया है उन्हें फ़िल्में मिलेंगी , लारा दत्ता ने अलग और अच्छा काम किया है। क्रिकेट खिलाड़ी युवराज के पिता जो कि पंजाबी फिल्मों में अभिनय करते हैं अक्षय के पिता की अच्छी भूमिका अभिनीत की हैं उन्होंने।  

 अक्षय के पिता का संवाद या तो शादी कर ले नही तो गोवा जाकर नौकरी कर ले।  कुछ अजीब है कहानी भी जब तब इधर उधर भटकती है पूरी फिल्म में पीटने वाला अक्षय आखिरी सीन में के के मेनन और उसके आदमियों को उठा उठा फेंकता है और सारी फिल्म में एक्शन करने वाली एमी इस सीन में चुपचाप खड़ी है। फिल्म का एक एक सीन जोड़ो तब कहीं जाकर आधी से भी काम फिल्म देखने लायक ही बनती है।  संगीत भी कुछ दमदार नही है। बस एक गीत "दिल करे चू चै चै चै " में आप फिल्म का पूरा मज़ा ले सकते हैं।  कुल मिलाकर आप समझ सकते हैं कि फिल्म "सिंह इज़ ब्लिंग " में सिंह ब्लिंग नही हुआ।

इससे तो आप २००८ में आयी फिल्म "सिंह इज़ किंग" दुबारा टी वी देख सकते हैं वो फिल्म इस फिल्म से बहुत ज्यादा अच्छी फिल्म थी। #singhisbliing