फिल्म 'सिंह इज़ ब्लिंग" पी वी आर , सिटी मॉल, अँधेरी ( वेस्ट ) मुंबई। शनिवार , ३ अक्टूबर सुबह ११ बजे का शो , ७० % दर्शक।
जो गलती निर्देशक प्रभुदेवा ने अपनी पिछली फिल्म "एक्शन जैक्सन " बनाकर की थी वहीं गलती उन्होंने "सिंह इज़ ब्लिंग" फिल्म बना कर की है। न तो यह फिल्म रोमांटिक फिल्म है न ही पूरी तरह से कॉमेडी और न ही एक्शन फिल्म है। पता नही क्या दिखाना चाहते हैं इस फिल्म में। जब - जब एमी परदे पर आती हैं एक्शन होता है और जब - जब लारा दत्ता आती हैं कॉमेडी होती है प्रभु ने दोनों काम दोनों नायिकाओं से करवा लिये हैं। अक्षय के काम तो इन दोनों अभिनेत्रयों ने ही कर लिये इसीलिये उनके हिस्से कुछ काम आया नही. सिवाय अपने पिता की डाँट खाने के। अच्छे अभिनेता होते हुए भी के के मेनन के हिस्से ऐसा काम आया है जो की कोई भी कर सकता था। संवाद भी पता नहीं कैसे कैसे बुलवाये हैं जो की उन पर बिल्कुल भी सूट नही करते। उनके हेयर स्टाइल की तरह.
एमी ने अच्छा एक्शन किया है उन्हें फ़िल्में मिलेंगी , लारा दत्ता ने अलग और अच्छा काम किया है। क्रिकेट खिलाड़ी युवराज के पिता जो कि पंजाबी फिल्मों में अभिनय करते हैं अक्षय के पिता की अच्छी भूमिका अभिनीत की हैं उन्होंने।
अक्षय के पिता का संवाद या तो शादी कर ले नही तो गोवा जाकर नौकरी कर ले। कुछ अजीब है कहानी भी जब तब इधर उधर भटकती है पूरी फिल्म में पीटने वाला अक्षय आखिरी सीन में के के मेनन और उसके आदमियों को उठा उठा फेंकता है और सारी फिल्म में एक्शन करने वाली एमी इस सीन में चुपचाप खड़ी है। फिल्म का एक एक सीन जोड़ो तब कहीं जाकर आधी से भी काम फिल्म देखने लायक ही बनती है। संगीत भी कुछ दमदार नही है। बस एक गीत "दिल करे चू चै चै चै " में आप फिल्म का पूरा मज़ा ले सकते हैं। कुल मिलाकर आप समझ सकते हैं कि फिल्म "सिंह इज़ ब्लिंग " में सिंह ब्लिंग नही हुआ।
इससे तो आप २००८ में आयी फिल्म "सिंह इज़ किंग" दुबारा टी वी देख सकते हैं वो फिल्म इस फिल्म से बहुत ज्यादा अच्छी फिल्म थी। #singhisbliing
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