रविवार, 3 दिसंबर 2017

तुम्हारी सुलु

17 नवम्बर को रिलीज हुई फ़िल्म #तुम्हारीसुलु आज भी दर्शकों को पसंद आ रही है । हैदराबाद, भारत के #आइनॉक्स (#जीकेवन) में 2 दिसम्बर को शाम 7. 35 के शो टाइम में थियेटर पूरा भरा हुआ था।फ़िल्म तो अच्छी थी ही लेकिन सबसे अच्छा यह लगा कि कुछ लोगों ने फ़िल्म के आखिरी में तालियाँ भी बजाई, जो कि आम तौर पर देखने को नहीं मिलता। मै फ़िल्म की पूरी कहानी नहीं बता रही बस इतना ही बता रही हूँ एक आम #गृहणी की कहानी है जो मस्त है खुश है अपनी जिंदगी में। उसे हर काम मे ,हर बात में बहुत मज़ा आता है , वो सब कुछ करना चाहती है क्या हुआ जो वो सिर्फ 12 क्लास तक ही पढ़ी है। निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने बहुत अच्छी फिल्म बनाई है । विद्या का काम तो हमेशा ही अच्छा होता है। बस इस बार काफी समय बाद उसकी कोई फ़िल्म #बॉक्सऑफिस पर भी अच्छी जा रही है। वैसे तो फ़िल्म #पद्मावती जिन कारणों से रिलीज नही हुई मैं उससे खुश नही हूँ लेकिन पद्मावती की वजह से शायद फ़िल्म तुम्हारी सुलु को ज्यादा दर्शक मिल पायें।  तो देखिए फ़िल्म तुम्हारी सुलु । आपको अच्छी लगेगी।

सोमवार, 18 सितंबर 2017

अलग विषय पर बनी है फिल्म ,इसलिए देख सकते हैं -- लखनऊ सेन्ट्रल

थैंक्स माँ, ना जाने कहाँ आयी है,पटियाला हॉउस, डी  डे, हीरो और कट्टी बट्टी आदि फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में काम करने वाले रंजीत तिवारी की पहली निर्देशित फिल्म है "लखनऊ सेन्ट्रल" . थियेटर में ७० प्रतिशत दर्शकों की  सँख्या देखकर यह समझ नहीं आया कि फ़रहान अख्तर के प्रशंसक भी हैं या फिर कंगना की फिल्म "सिमरन" की वजह से दर्शक यह फिल्म देखने आये थे. खैर वजह जो भी हो। 
 मुरादाबाद की जेल से लखनऊ की जेल में लाये गये किशन  मोहन गिरहोत्रा ( फ़रहान अख़्तर ) की कहानी है फिल्म "लखनऊ सेन्ट्रल ". किसी की हत्या किये बिना ही हत्या की सज़ा काट रहे किशन  जेल से भागने के लिये पाँच कैदियों का एक बैंड बनाता है लेकिन आखिरी में भागता नहीं बल्कि अपने बैंड के साथियों के साथ दिक्कत अंसारी ( इनामुलहक ) विक्टर चट्टोपाध्याय (दीपक डोबरियाल ) पुरुषोत्तम पंडित ( राजेश शर्मा ) परमिंदर ( गिप्पी ग्रेवाल ) के साथ शानदार परफॉर्म करता है और सबकी तारीफ़ों का हक़दार बनता है. 
  जिस झूठी गवाही से किशन  को उम्र कैद और फिर फाँसी की सज़ा सुनाई  गयी थी। बाद में  एन  जी ओ में काम करने वाली  गायत्री कश्यप ( डायना पेंटी ) की मदद से झूठा गवाह सच बोलता है जिससे  किशन रिहा हो जाता है। 
फिल्म का  पहला भाग धीमा है बोरियत होने लगती है जबकि दूसरा भाग दर्शकों में बाँधने में सफल होता है।  कुछ - कुछ खामियाँ हैं फिल्म में , लेकिन फिर भी अलग विषय पर बनी है फिल्म ,इसलिए देख सकते हैं।  रवि किशन और रॉनित रॉय के साथ - साथ सभी ने अच्छा काम किया है ।  फ़रहान के साथ उनके जेल के सभी साथियों ने अच्छा काम किया है।   
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बुधवार, 17 मई 2017

अंग्रेजी मीडियम में पढ़े लिखे लोग भी देखें फिल्म हिंदी मीडियम

सिने पोलिस ( पुराना नाम - फन सिनेमा )अँधेरी वेस्ट, मुंबई ।  प्रेस शो ,मीडिया को समय दिया ७ बजे शाम का , फिल्म शुरू हुई ७ बजकर २५ मिनट पर , छोटे से लेकर बड़े सभी अख़बार , रेडिओ, चैनल पर फिल्म रिव्यु करने वाले फिल्म समीक्षक मौजूद फिल्म #हिंदीमीडियम देखने के लिये। यानि इरफ़ान खान की फिल्म हो और ऐसी भीड़ न हो कैसे हो सकता है। लेकिन #सिनेपोलिस की सर्विस बहुत ही बेक़ार फिल्म शुरू होने से पहले तक उसने मीडिया वालों को पॉप कॉर्न भी नहीं दिये यह कर मना कर दिया कि अभी शुरू नहीं किया है। 
ख़ैर छोड़ो इन सब बातों को हम तो इरफ़ान की फिल्म देखने गये तो देखी भी उस दर्द को भी महसूस किया। आप भी फिल्म देखें और सच में उन माता पिता के दर्द को समझें जो अपने बच्चों का एडमिशन अच्छे स्कूल में कराना चाहते हैं जिससे उनका बच्चा फ़र्राटेदार अँग्रेजी बोल सके क्योंकि अँग्रेजी बोलने वाला ही हिन्दुस्तान में ऊँचे ओहदे पर होता है। 
ऐसी मानसिकता है आज हमारे देश की , हिंदी बोलने वाला जितना भी बुद्धिमान हो लेकिन उसे दोयम दर्जे का नागरिक ही समझा जाता है. हिंदी मीडियम में पढ़ा लिखा राज चाँदनी चौक में बड़ा सा लंहगों और साड़ियों के शो रूम का मालिक अपने बेटी का दिल्ली के सबसे अच्छे स्कूल में एडमिशन कराना चाहता है लेकिन ऐसे स्कूल तो सिर्फ धंधा करते हैं पढ़ाई के नाम पर।  राइट तो एजुकेशन यानि आर टी इ के नाम पर गरीबों को बेवकूफ़ बनाते हैं। स्कूलों का यह व्यापार दिन रात यूं ही फलेगा जब तक  हमारी सरकार , शिक्षा विभाग   स्कूलों के कंधे पर अपना हाथ रखते रहेंगे। 
फिल्म की कहानी अच्छी , अभिनय अच्छा , फिल्म थोड़ी धीमी है लेकिन अच्छा सन्देश मनोरंजन भी भरपूर है।  तो
देखें अंग्रेजी मीडियम में पढ़े लिखे लोग भी फिल्म हिंदी मीडियम।