रिलीज़ --- ज़ी ५ पर
लेखन और निर्देशन -- सतीश कौशिक
निर्माता -- सलमान खान , निशांत कौशिक , विकास मालू
कलाकार -- पंकज त्रिपाठी , मोनल गज्जर ,सतीश कौशिक
संगीत -- प्रवेश मल्लिक , राहुल जैन
कागज़ की अहमियत हमारे जीवन में क्या है ? यह बात हमें तब पता चलती है जब हम सरकारी काम से किसी दफ्तर में जाते हैं। अगर सरकारी कागजो में जीवित इंसान भी मरा हुआ दिखाई दे तो सोचिये उस व्यक्ति के जीवन में कितना उथल - पुथल होगा। यह फिल्म "कागज़" भी एक सच्ची कहानी पर आधारित है। यह कहानी है उस लाल बिहारी मृतक नाम के व्यक्ति की। जिसने 18 साल के लंबे संघर्ष के बाद खुद को जीवित साबित किया।
समीक्षा --- फिल्म की कहानी "कागज़ " में तो बहुत ही मार्मिक लगती है। उस व्यक्ति के प्रति भी सहानुभूति होती है जिसकी जिंदगी में यह भूचाल आया कि जिन्दा होते हुए भी उसे साबित करना पड़ा कि वो जिन्दा है लेकिन फ़िल्म में यह कहीं भी महसूस नहीं होता। कहीं भी आँखे नम नहीं होती , दिल में दर्द नहीं होता क्योंकि निर्देशन में बहुत कमियाँ हैं।" तेरे नाम" जैसी सुपर हिट फिल्म बनाई थी सतीश कौशिक ने लेकिन फिल्म "कागज़ " के प्रति उनसे न्याय नहीं हो पाया है। बहुत धीमी फिल्म है , इसलिए बहुत बढ़ी फिल्म लगती है। बीच बीच में सतीश कौशिक की कमेंट्री बहुत बोर करती है। हाँ फिल्म में अगर कुछ देखने लायक है तो वो हैं पंकज त्रिपाठी। उन्हें देखना अच्छा लगता है। हमेशा की तरह शानदार अभिनय किया है उन्होंने साथ में उनकी पत्नी बनी मोनल ग़ज़्ज़र ने भी अच्छा काम किया है।

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