सोमवार, 18 मई 2015

मुंबई के विकास की कहानी बॉम्बे वेलवेट

निर्देशक @अनुराग कश्यप की फिल्म #बॉम्बे वेलवेट के बारें में बहुत सी बातें सुनने को मिलीं।  जिसमें से अच्छी कम बुरी ज्यादा थी।  मैं भी बेमन से इस फिल्म को देखने गयी। देखने इसलिए गयी क्योंकि यह फिल्म अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित थी तो उत्सुकता तो थी ही। 

जब तक फिल्म की कहानी बनी यानि हीरो - हीरोइन छोटे थे फिल्म जरूर नीरस लग रही थी लेकिन जैसे ही  रणबीर कपूर परदे पर आये फिल्म में जान आ गयी शुरू से लेकर आखिरी तक उनका अभिनय लाजवाब रहा।  

  लेखक @ज्ञान प्रकाश की किताब "मुंबई फैबल्स " पर आधारित इस फिल्म में बड़े ओहदों पर बैठे अफसर, नेता, पुलिस अधिकारी और अखबारों के एडिटर कैसे - कैसे जोड़ तोड़ करते हैं और किस हद तक नीचे गिर जाते हैं।  इस फिल्म में  पांचवे और छठे दशक का  बॉम्बे दिखाया गया है। फिल्म में जोड़ तोड़ , गलत तरीके से अपना काम निकालना यह सब है। छोटी - छोटी चोरी करते - करते बलराज से जॉनी बने ( रणबीर कपूर ) और जैज गायिका रोज़ी (अनुष्का ) के प्यार की कहानी के साथ - साथ मुंबई के विकास की कहानी भी है कि कैसे मिल मजदूरो के कब्रिस्तान पर मुंबई की बड़ी- बड़ी इमारतें बनी।  बहुत कुछ सच्ची घटनाओं से प्रेरित भी है फिल्म। सच्चाई हमेशा कड़वी होती है तो कई बार फिल्म नीरस भी हो जाती है। 

एक खलनायक के रूप में @करन जौहर ने अच्छा काम किया है। आखिरी का एक संवाद जिसमें वो जॉनी से कहते हैं "तूने रोज़ी में ऐसा क्या देखा जो मुझमें नही है"  इसे सुनकर दर्शक बहुत जोर - जोर से हंस रहे थे. अनुष्का का काम भी अच्छा था लेकिन मुझे एक बात समझ नही आयी रोज़ी के किरदार के लिये उन्होंने अपने होठों के साथ खिलवाड़ क्यों किया। के के मेनन (पुलिस अफसर ) सत्यदीप मिश्रा (बलराज का दोस्त - चिमन ) सभी का काम अच्छा था। 

बुरा था कि सब कुछ दिखाने के चक्कर में फिल्म बड़ी बन गयी, कुछ छोटी हो जाती तो फिल्म से नीरसता चली जाती और दर्शक ज्यादा आनंद उठा पाते और फिल्म के निर्माता भी अपनी लागत निकाल पाते।   

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