रविवार, 15 मई 2016

अज़हरुद्दीन के पॉइंट ऑफ़ व्यू से बनाई गयी अज़हर

पी वी आर सिटी मॉल अँधेरी वेस्ट फिल्म "अज़हर " दोपहर ११- ५० का शो टाइम , थिएटर लगभग भरा। 

लेकिन जो दर्शक इस फिल्म में देखना चाहते थे वो नहीं था इस फिल्म "अज़हर" में। जबकि हर कोई जानता है कि यह फिल्म  क्रिकेट खिलाडी मोहम्मद अज़हरुद्दीन के जीवन पर बनी है और फिल्म के लगभग हर प्रोमोशन पर भी वो फिल्म के कलाकारों  इमरान हाशमी , प्राची देसाई और लारा दत्ता के साथ दिखाई दिये बावजूद  इसके, फिल्म के निर्माता - निर्देशक फिल्म के शुरू में ही यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि यह फिल्म  मोहम्मद अज़हरुद्दीन की जीवनी नहीं बल्कि दर्शकों के मनोरंजन के लिये बनाई गयी है इस फिल्म में फिल्माये गये दृश्य भी सभी सच नहीं है. जिससे इस फिल्म को देख कर कोई भी खिलाडी जिन्हे इस फिल्म में दिखाया गया है वो फिल्म के निर्माता को कचहरी के दर्शन न करा दे। 

फिल्म बहुत धीमी है , ठीक है फिल्म अज़हरुद्दीन को लेकर बनाई है लेकिन कुछ तो दूसरे खिलाडियों का पक्ष भी दिखाना चाहिये था. फिल्म में बार - बार अज़हर कहते हैं कि मैं अपनी दोनों पत्नियों को कोर्ट में नहीं लेकर आऊँगा लेकिन फिल्म के निर्देशक उनकी पत्नी के साथ कई बार लम्बे - लम्बे किसिंग सीन दिखाते हैं।  दोहरा मानसिकता क्यों दिखाई निर्देशक टोनी डिसूजा ने,?  क्या वो इमरान हाशमी की सीरियल किसर की जो छवि है उसे भुनाना रहे थे या अज़हर पर फिल्म बना रहे थे ? शायद वो ही भूल गये थे। 

संगीता कभी भी बहुत बड़ी अभिनेत्री नहीं रही थी और उनकी एक भी फिल्म सुपर हिट नहीं रही हाँ सलमान खान के साथ अपने रिश्तों को लेकर ही बस वो चर्चा में थी जबकि इस फिल्म में उन्हें बड़ी हीरोइन कहा गया। 

यह तो शुरू से ही सब कह रहे थे कि इमरान हाशमी फिल्म में कहीं भी अज़हर जैसे नहीं लग रहे हैं और यह सच ही साबित भी हुई. हाँ यह बात अलग है कि इमरान ने अपना काम ठीक ठाक किया है। फिर भी दर्शक सिर्फ अज़हरुद्दीन के लिए ही फिल्म देखने जा रहे हैं और उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। अज़हरुद्दीन के पॉइंट ऑफ़ व्यू से बनाई गयी इस फिल्म में उन्हें बिलकुल मासूम और दूसरों को छिछोरा दिखाया है जैसे रवि शास्त्री को दिखाया है।  

इस फिल्म की एक ख़ास बात यह है कि अभिनेता कुणाल रॉय कपूर की यह फिल्म बेहतरीन फिल्म कही जा सकती है क्योंकि उन्होंने वकील की अच्छी भूमिका अभिनीत की है।  लारा , प्राची और नरगिस ने भी ठीक काम किया है 

#अज़हरुद्दीन #इमरानहाशमी #कुणालरॉयकपूर

शनिवार, 7 मई 2016

सच्ची घटना पर भावुक फिल्म ट्रैफिक


चेन्नई की सच्ची घटना से प्रेरित है फिल्म ट्रैफिक।  निर्देशक राजेश पिल्लई ने पहले २०११ में मलयालम में इस फिल्म को बनाया।  वहां बहुत सराहा दर्शकों ने इस फिल्म को ,फिर उन्होंने इसी फिल्म को इसी नाम से हिंदी में बनाने के बारें में सोचा। लेकिन राजेश हिंदी में बनी फिल्म "ट्रैफिक" की रिलीज़ देख पाते उससे पहले ही  फरवरी २०१६ में उनका  स्वर्गवास हो गया।  

बहुत ही कसी और भावुक कर देने वाली फिल्म है कि कैसे एक १२ साली की बच्ची का हार्ट ट्रांसप्लांट होता है ?कैसे मुंबई के ट्रैफिक में से ट्रैफिक कॉन्स्टेबल पुलिस की गाड़ी से सिर्फ ढाई घंटे में हार्ट पूना में पंहुचा देता है जबकि मुंबई में बहुत तेज बारिश है फिर भी  १२० किमी की रफ़्तार से गाड़ी चला कर कॉन्स्टेबल यह सब कर दिखाता है उस समय जबकि पुलिस के बड़े अफसर भी मना कर देते हैं क्योंकि ट्रैफिक की वजह से ऐसा सम्भव नहीं है ? 
कैसे पुलिस विभाग और ट्रैफिक विभाग जी जान लगा देता है उस बच्ची की जान बचाने के लिये ?
सभी कलाकारों ने उम्दा अभिनय किया है चाहे वो मनोज बाजपेयी हो , जिमी शेरगिल , दिव्या दत्ता , सचिन खेड़ेकर हो या किट्टू गिडवानी।  इस फिल्म में बंगाली अभिनेता प्रसन्नजीत चटर्जी और परमब्रता चटर्जी भी हैं।   

इस फिल्म को देखकर कुछ लोग सच में प्रेरित हो तो ऐसे कई लोगों की जान बचायी जा सकती है।