लेकिन जो दर्शक इस फिल्म में देखना चाहते थे वो नहीं था इस फिल्म "अज़हर" में। जबकि हर कोई जानता है कि यह फिल्म क्रिकेट खिलाडी मोहम्मद अज़हरुद्दीन के जीवन पर बनी है और फिल्म के लगभग हर प्रोमोशन पर भी वो फिल्म के कलाकारों इमरान हाशमी , प्राची देसाई और लारा दत्ता के साथ दिखाई दिये बावजूद इसके, फिल्म के निर्माता - निर्देशक फिल्म के शुरू में ही यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि यह फिल्म मोहम्मद अज़हरुद्दीन की जीवनी नहीं बल्कि दर्शकों के मनोरंजन के लिये बनाई गयी है इस फिल्म में फिल्माये गये दृश्य भी सभी सच नहीं है. जिससे इस फिल्म को देख कर कोई भी खिलाडी जिन्हे इस फिल्म में दिखाया गया है वो फिल्म के निर्माता को कचहरी के दर्शन न करा दे।
फिल्म बहुत धीमी है , ठीक है फिल्म अज़हरुद्दीन को लेकर बनाई है लेकिन कुछ तो दूसरे खिलाडियों का पक्ष भी दिखाना चाहिये था. फिल्म में बार - बार अज़हर कहते हैं कि मैं अपनी दोनों पत्नियों को कोर्ट में नहीं लेकर आऊँगा लेकिन फिल्म के निर्देशक उनकी पत्नी के साथ कई बार लम्बे - लम्बे किसिंग सीन दिखाते हैं। दोहरा मानसिकता क्यों दिखाई निर्देशक टोनी डिसूजा ने,? क्या वो इमरान हाशमी की सीरियल किसर की जो छवि है उसे भुनाना रहे थे या अज़हर पर फिल्म बना रहे थे ? शायद वो ही भूल गये थे।
संगीता कभी भी बहुत बड़ी अभिनेत्री नहीं रही थी और उनकी एक भी फिल्म सुपर हिट नहीं रही हाँ सलमान खान के साथ अपने रिश्तों को लेकर ही बस वो चर्चा में थी जबकि इस फिल्म में उन्हें बड़ी हीरोइन कहा गया।
यह तो शुरू से ही सब कह रहे थे कि इमरान हाशमी फिल्म में कहीं भी अज़हर जैसे नहीं लग रहे हैं और यह सच ही साबित भी हुई. हाँ यह बात अलग है कि इमरान ने अपना काम ठीक ठाक किया है। फिर भी दर्शक सिर्फ अज़हरुद्दीन के लिए ही फिल्म देखने जा रहे हैं और उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। अज़हरुद्दीन के पॉइंट ऑफ़ व्यू से बनाई गयी इस फिल्म में उन्हें बिलकुल मासूम और दूसरों को छिछोरा दिखाया है जैसे रवि शास्त्री को दिखाया है।
इस फिल्म की एक ख़ास बात यह है कि अभिनेता कुणाल रॉय कपूर की यह फिल्म बेहतरीन फिल्म कही जा सकती है क्योंकि उन्होंने वकील की अच्छी भूमिका अभिनीत की है। लारा , प्राची और नरगिस ने भी ठीक काम किया है
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