चेन्नई की सच्ची घटना से प्रेरित है फिल्म ट्रैफिक। निर्देशक राजेश पिल्लई ने पहले २०११ में मलयालम में इस फिल्म को बनाया। वहां बहुत सराहा दर्शकों ने इस फिल्म को ,फिर उन्होंने इसी फिल्म को इसी नाम से हिंदी में बनाने के बारें में सोचा। लेकिन राजेश हिंदी में बनी फिल्म "ट्रैफिक" की रिलीज़ देख पाते उससे पहले ही फरवरी २०१६ में उनका स्वर्गवास हो गया।
बहुत ही कसी और भावुक कर देने वाली फिल्म है कि कैसे एक १२ साली की बच्ची का हार्ट ट्रांसप्लांट होता है ?कैसे मुंबई के ट्रैफिक में से ट्रैफिक कॉन्स्टेबल पुलिस की गाड़ी से सिर्फ ढाई घंटे में हार्ट पूना में पंहुचा देता है जबकि मुंबई में बहुत तेज बारिश है फिर भी १२० किमी की रफ़्तार से गाड़ी चला कर कॉन्स्टेबल यह सब कर दिखाता है उस समय जबकि पुलिस के बड़े अफसर भी मना कर देते हैं क्योंकि ट्रैफिक की वजह से ऐसा सम्भव नहीं है ?
कैसे पुलिस विभाग और ट्रैफिक विभाग जी जान लगा देता है उस बच्ची की जान बचाने के लिये ?
सभी कलाकारों ने उम्दा अभिनय किया है चाहे वो मनोज बाजपेयी हो , जिमी शेरगिल , दिव्या दत्ता , सचिन खेड़ेकर हो या किट्टू गिडवानी। इस फिल्म में बंगाली अभिनेता प्रसन्नजीत चटर्जी और परमब्रता चटर्जी भी हैं।
इस फिल्म को देखकर कुछ लोग सच में प्रेरित हो तो ऐसे कई लोगों की जान बचायी जा सकती है।

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