हमारे संस्कारी बाबा पहलाज निहलानी को ये हुआ क्या ? उन्होंने फिल्म "बेफ़िक्रे " को यू / ए सार्टिफिकेट दे दिया यह कह कर कि यह फिल्म हमारी संस्कृति का हिस्सा नही है जो भी इस फिल्म में दिखाया है कि पेरिस के युवक युवतियाँ ऐसा ही करते हैं न कि हमारे देश में। जबकि सभी जानते हैं कि इस फिल्म में २३ किसिंग सीन हैं और इस फिल्म को ए सार्टिफिकेट मिलना चाहिये था। इस फिल्म से पहले पहलाज निहलानी ने जेम्स बांड का किसिंग सीन भी सेंसर कर दिया था उस फिल्म की कहानी भी यहाँ की संस्कृति का हिस्सा नही थी फिर भी। कोई तो उनसे पूछो कि यह फिल्म कहाँ दिखाई जायेगी यहाँ भारत में या पेरिस में। क्या इस फिल्म को देखकर यहाँ के दर्शकों पर कुछ असर नही होगा ? मंगलवार, 29 नवंबर 2016
बेफ़िक्रे को मिला यू / ए सर्टिफिकेट
हमारे संस्कारी बाबा पहलाज निहलानी को ये हुआ क्या ? उन्होंने फिल्म "बेफ़िक्रे " को यू / ए सार्टिफिकेट दे दिया यह कह कर कि यह फिल्म हमारी संस्कृति का हिस्सा नही है जो भी इस फिल्म में दिखाया है कि पेरिस के युवक युवतियाँ ऐसा ही करते हैं न कि हमारे देश में। जबकि सभी जानते हैं कि इस फिल्म में २३ किसिंग सीन हैं और इस फिल्म को ए सार्टिफिकेट मिलना चाहिये था। इस फिल्म से पहले पहलाज निहलानी ने जेम्स बांड का किसिंग सीन भी सेंसर कर दिया था उस फिल्म की कहानी भी यहाँ की संस्कृति का हिस्सा नही थी फिर भी। कोई तो उनसे पूछो कि यह फिल्म कहाँ दिखाई जायेगी यहाँ भारत में या पेरिस में। क्या इस फिल्म को देखकर यहाँ के दर्शकों पर कुछ असर नही होगा ? सोमवार, 28 नवंबर 2016
एक अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं तो जरूर देखें डियर जिंदगी
जब फिल्म देखने के लिए सिनेमा हॉल पंहुचे तब बहुत सारी महिलायें नीचे ही दिखाई दे गयी , पहले तो भीड़ देख कर माज़रा समझ नही आया क्या हो गया एक साथ २५ - ३० महिलाओं की भीड़ , ऐसा लगा कि बाहर कहीं पर फ्री में टिकट बंट रही थी लेकिन फिर समझ आया कि किटी पार्टी थी तो सब एक साथ फिल्म देखने आयी थीं। करीब ४ लाइनें सब उन्हीं की थी। पहले मुझे लगा कि आज फिल्म अच्छे से देख नही पाऊँगी क्योंकि जब भी बड़ा ग्रुप कोई साथ में बैठा होता है तो उनकी इतनी बातें होती हैं कि आप फिल्म के सम्वाद सुन नही सकते लेकिन जिसका मुझे डर था वो कुछ भी नहीं हुआ और बहुत अच्छे से फिल्म देखी और आनंद भी उठाया।
क्योंकि गौरी शिंदे ने बहुत अच्छी फिल्म बनायी है। कहानी ,संवाद , अभिनय, गीत - संगीत, निर्देशन सभी अच्छा कहीं कुछ भी दर्शकों पर थोपा हुआ नही था नहीं तो आज जिस तरह की फ़िल्में बनती हैं समझ ही नही आता कि क्या बनाना चाह रहे थे और क्या बन गया ? जिंदगी बहुत आसान नही है , प्यार , रिश्ते , सम्बन्ध , कॅरियर सभी कुछ व्यक्ति को मन मुताबिक मिल जाये ऐसा बहुत कम होता है और जिसके साथ ऐसा होता है वो बहुत ही खुश नसीब होता है।
सभी की जिंदगी में कुछ न कुछ मुश्किल आती हैं ऐसे में किसी जग ( पानी वाला जग नही ) यानि डॉ जहांगीर खान ( शाहरुख़ ) जैसा सायकोलॉजिस्ट मिल जाये तो जिंदगी कितनी आसान हो जाये। जिंदगी की मुश्किल घड़ी में काश हर किसी ऐसा मेंटर मिल जाये तो क्या कहने।
अपनी जिंदगी से प्यार करें , बिना डरे वो सब करें जो करना चाहते हैं , जिंदगी बहुत प्यारी है। कायरा (आलिया भट्ट ) की तरह अपनी जिंदगी की उलझन सुलझायें और खुश रहें।
एक अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं तो डियर जिंदगी जरूर देखें
मंगलवार, 1 नवंबर 2016
"शिवाय" फिल्म धार्मिक नही है
अजय देवगन की फिल्म "शिवाय" जिसका सभी को बेताबी से इंतज़ार था लेकिन यह फिल्म उस तरह से प्रभावित नही कर सकी जैसे की दर्शकों को उम्मीद थी। हालाँकि एक्शन बहुत ही अच्छे हैं फिल्म में, लेकिन फिर भी फिल्म कहीं - कहीं बहुत धीमी हो जाती है दर्शकों को उँबासी आने लगती है ।
फिल्म के शुरुआत में जिस तरह से गीत "बोलो हर हर " से अजय देवगन की एंट्री होती है वो बहुत ही अच्छा है देखने। पौन घण्टे की फिल्म एडिट हो जाये तो दर्शक बिना ऊबे हुए फिल्म का आनंद उठा सकते हैं। क्योंकि फिल्म की कहानी तो पुरानी ही है उस पर दृश्य बहुत लंबे हैं। हीरो - हीरोइन मिले प्यार हुआ , हीरोइन गर्भवती हो गयी उसे बच्चा नही चाहिए उसकी मजबूरी है, हीरो को बच्चा चाहिए। बच्चे के जन्म के बाद हीरोइन अपने देश वापस चली गयी। अकेला हीरो बेटी को पालता है। थोड़ी बड़ी होने पर बेटी को अपनी माँ के बारें में पता चलता है उसे अपनी माँ से मिलना है। हीरो ले जाता है मिलाने फिर बेटी किडनैप हो जाती है। बस शिवाय का सिंघम जाग जाता है। यानि एक्शन ही एक्शन वैसे पिता - पुत्री के बीच के दृश्य बहुत भावुक करने वाले हैं।
"बोलो हर हर महादेव " गीत अच्छा है , लेकिन कैलाश खेर के गाये गीत का फिल्मांकन बहुत ही बुरा है। "तेरे नाल इश्का " में सायशा सैगल को पता नही क्यों बाथ टब में दिखाया ? सायशा अच्छी लगी हैं फिल्म में। वीर दास ने अच्छा काम किया है। एरिका कार और एबीगेल एमेस का काम भी अच्छा है।
अजय देवगन की कहानी है निर्देशन भी उन्हीं का तो हर फ्रेम में वो ही है। फिल्म का नाम शिवाय जरूर है लेकिन फिल्म धार्मिक नही है . २८ अक्टूबर को रिलीज़ हुई फिल्म "शिवाय " ने ४ दिनों में कुल कमाई की है ४५. ९१ लाख जबकि ९५ करोड़ में बनी है।
"शिवाय " और "ऐ दिल है मुश्किल " दोनों फिल्मों के एक साथ रिलीज़ होने पर अजय देवगन के कहा था कि ," जो फिल्म अच्छी होगी वो ही सफल होगी। " अब देखते हैं कौन सी हिट होगी वैसे अभी तक कमाई में देखें तो करन जौहर की फिल्म आगे है।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)