जब फिल्म देखने के लिए सिनेमा हॉल पंहुचे तब बहुत सारी महिलायें नीचे ही दिखाई दे गयी , पहले तो भीड़ देख कर माज़रा समझ नही आया क्या हो गया एक साथ २५ - ३० महिलाओं की भीड़ , ऐसा लगा कि बाहर कहीं पर फ्री में टिकट बंट रही थी लेकिन फिर समझ आया कि किटी पार्टी थी तो सब एक साथ फिल्म देखने आयी थीं। करीब ४ लाइनें सब उन्हीं की थी। पहले मुझे लगा कि आज फिल्म अच्छे से देख नही पाऊँगी क्योंकि जब भी बड़ा ग्रुप कोई साथ में बैठा होता है तो उनकी इतनी बातें होती हैं कि आप फिल्म के सम्वाद सुन नही सकते लेकिन जिसका मुझे डर था वो कुछ भी नहीं हुआ और बहुत अच्छे से फिल्म देखी और आनंद भी उठाया।
क्योंकि गौरी शिंदे ने बहुत अच्छी फिल्म बनायी है। कहानी ,संवाद , अभिनय, गीत - संगीत, निर्देशन सभी अच्छा कहीं कुछ भी दर्शकों पर थोपा हुआ नही था नहीं तो आज जिस तरह की फ़िल्में बनती हैं समझ ही नही आता कि क्या बनाना चाह रहे थे और क्या बन गया ? जिंदगी बहुत आसान नही है , प्यार , रिश्ते , सम्बन्ध , कॅरियर सभी कुछ व्यक्ति को मन मुताबिक मिल जाये ऐसा बहुत कम होता है और जिसके साथ ऐसा होता है वो बहुत ही खुश नसीब होता है।
सभी की जिंदगी में कुछ न कुछ मुश्किल आती हैं ऐसे में किसी जग ( पानी वाला जग नही ) यानि डॉ जहांगीर खान ( शाहरुख़ ) जैसा सायकोलॉजिस्ट मिल जाये तो जिंदगी कितनी आसान हो जाये। जिंदगी की मुश्किल घड़ी में काश हर किसी ऐसा मेंटर मिल जाये तो क्या कहने।
अपनी जिंदगी से प्यार करें , बिना डरे वो सब करें जो करना चाहते हैं , जिंदगी बहुत प्यारी है। कायरा (आलिया भट्ट ) की तरह अपनी जिंदगी की उलझन सुलझायें और खुश रहें।
एक अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं तो डियर जिंदगी जरूर देखें
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