शनिवार, 24 दिसंबर 2016

पहलवानी केवल छोरे ही नहीं म्हारी छोरियाँ भी कर सकती हैं

पी वी आइकॉन, वर्सोवा अँधेरी वेस्ट मुम्बई , फिल्म "दंगल "  शो टाइम शनिवार ,दोपहर ११ बजकर ३० मिनट।  पूरा थियेटर भरा हुआ दर्शकों से। ऐसा तब ही होता है जब फिल्म बहुत अच्छी हो।  इससे पहले फिल्म "क़्वीन " में ऐसा देखने को मिला था। आज सबसे अच्छी बात थियेटर में यह देखने को मिली कि जब गीता फ़ोगाट गोल्ड मेडल जीत जाती है और देश का राष्ट्रीय गीत "जन गण मन " बजता है तब फिल्म के अंदर के साथ - साथ थियेटर में भी सारे दर्शक इसके सम्मान में खड़े हो जाते हैं।  यह सच में दिल को छू लेता है।  

फिल्म "दंगल" भूतपूर्व पहलवान महावीर सिंह फोगट और उनकी बेटियाँ गीता और बबीता ( जोकि दोनों ही पहलवान हैं ) के जीवन पर आधारित है। यह फिल्म केवल रेसलिंग पर ही आधारित नही है बल्कि यह एक पिता और उसकी बेटियों के बीच के भावनात्मक सफर की कहानी है. एक ऐसा पिता जो कि अपनी बेटियों की सशक्त बनने की शिक्षा देता है और फिर  बेटियाँ किस तरह से अपने पिता की  सिखाई शिक्षा से पिता के सपनों को पूरा करती हैं। 

कुश्ती खेल पर आधारित फिल्म है लेकिन फिर भी कहीं से भी नीरस नही है दर्शको को एक भी पल ऊब नही होती और एक भी दर्शक थियेटर से बाहर नही जाता  छोटे से लेकर बड़े सभी कलाकारों ने अच्छा अभिनय किया है तभी फिल्म अच्छी बनी है।  हरियाणा के छोटे से क़स्बे बिलाली से अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर रेसलिंग खेलने जाना बहुत बड़ी बात है किसी भी लड़की के लिए। हरियाणा जहाँ लड़की का जन्म लेना ही अपराध माना जाता है जहाँ सबसे ज्यादा कन्या भ्रूण हत्या होती है वहाँ की लड़की जब इस स्तर पर पँहुचती है तो खुद पर गर्व होता है कि हम भी उसी भारत देश के नागरिक हैं। 

फिल्म #दंगल जरूर जाकर देखें अच्छी फिल्म है लड़कियाँ ही नही उनके घर वाले , रिश्तेदार आस पड़ोस वाले भी समझ पायेगें कि पहलवानी केवल छोरे ही नहीं  म्हारी छोरियाँ  भी कर सकती हैं क्योंकि म्हारी छोरियाँ छोरों से कम हैं के. 

आमिर खान , साक्षी तंवर , फ़ातिमा सना शेख़ , ज़ायरा वसीम, सान्या मल्होत्रा , सुहानी भटनागर , रोहित शंकरवार ,अपारशक्ति खुराना  और निर्देशक नितेश तिवारी सभी का धन्यवाद ऐसी अच्छी फिल्म बनाने के लिये।

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

शुद्ध देसी रोमांस जैसी फिल्म देखना पसन्द करते हैं तो यह फिल्म "बेफ़िक्रे "आपके लिए ही है

पी वी आर आइकॉन , वर्सोवा अँधेरी वेस्ट ,  मुम्बई , तारीख़  ९ दिसम्बर , फिल्म "बेफ़िक्रे " शो टाइम १ बजकर २० मिनट ,   मात्र २० % दर्शकों की उपस्थिति।  आज ही रिलीज़ हुई फिल्म बेफ़िक्रे और आज ही हुआ यह हाल। ट्रेलर देखकर ही यह समझ आ गया था कि फिल्म कैसी होगी ? जहाँ से छिछोरे पन की शुरुआत होता है वहीं से समझ लीजिये यह फिल्म शुरू होती है।  फिल्म की कास्टिंग शुरू , साथ में गाना "लबों का कारोबार " शुरू साथ में करीब १० - १५ जोड़ियाँ परदे पर किस करती  हुई दिखाई देती हैं। 

हवस के पुजारियों के लिए बनाई गयी इस फिल्म की कहानी पुरानी है ऐसी कई फ़िल्में पहले भी आ चुकी हैं जिनमें नायक - नायिका यह कहते हैं कि कभी भी एक दूसरे को आई लव यू नही कहेगें लेकिन लिव इन में रहेगें।
लेकिन जब - जब अलग - अलग शादी करने जा रहे होते हैं तब आखिरी समय में उन्हें समझ आता है कि उन्हें यह शादी नही करनी क्योंकि वो तो किसी दूसरे से प्यार करते हैं और फिर उबाऊ लंबे दृश्य  और बेवकूफी भरे सीन।  

कहीं पढ़ा था कि आदित्य चोपड़ा ने अपनी और रानी की प्रेम कहानी और शादी को समर्पित की है यह फिल्म।  वाह क्या बात है इससे अच्छी फिल्म नही बना पाये अपनी और रानी की प्रेम कहानी के लिये।  

एक अच्छी प्रेम कहानी देखना चाहते हैं तो आपको यह फिल्म निराश करेगी लेकिन अगर आप को किस और सेक्स के लिए पागल जोड़े  को देखना है तो आपको पसन्द आयेगी।  आज के हमारे युवा दर्शकों को हो सकता है अच्छी लगे यह फिल्म "बेफ़िक्रे " क्योंकि उन पर पाश्चात्य देशों का प्रभाव ज्यादा हो गया है। कहानी के साथ लिप लॉक होता तो शायद फिल्म बेहतर होती।  आप शुद्ध देसी रोमांस जैसी फिल्म देखना पसन्द करते हैं तो यह फिल्म "बेफ़िक्रे "आपके लिए ही है। 

बेफ़िक्रे में रनवीर और वानी ने  इमरान हाशमी को भी पीछे छोड़ दिया है। 

सोमवार, 5 दिसंबर 2016

अगर आप विद्या बालन के प्रशंसक हैं तो फिल्म देखें "कहानी २ : दुर्गा रानी सिंह

फिल्म "कहानी २ : दुर्गा रानी सिंह , दोपहर १२ बजे का शो , पी वी आर सिटी मॉल , अँधेरी वेस्ट , मुम्बई , मुश्किल से ३० के करीब दर्शक। आश्चर्य हुआ यह देखकर कि विद्या बालन की फिल्म और वो भी कहानी - २ , जिसकी पिछली फिल्म कहानी ने दर्शकों के रोयें  खड़े कर दिये थे उसकी सीक्वेल फिल्म का हश्र यह  होगा , आज चौथे दिन तक की कमाई मात्र 16.97  करोड़।  

बाल शोषण को कहानी का केंद्र बना कर बनाई गयी इस फिल्म में वो बात नही थी जो कि कहानी में थी।  अगर विद्या बालन नही होती इस फिल्म में तो शायद इतनी भी कमाई नही होती जितनी कि  हुई है। फिल्म "कहानी " में आखिरी दृश्य तक सस्पेंस बना हुआ था कि कैसे गर्भवती विद्या बागची बदला लेगी जबकि इस फिल्म में तो आधे घण्टे बाद ही दर्शकों को समझ आ गया था कि क्या होने वाला है।

निर्देशक सुजॉय ने जब फिल्म में अर्जुन रामपाल जैसे अभिनेता को कास्ट किया तो तभी समझ में आ गया  कि वो भी कुछ न कुछ तो फिल्म में करेगा ही केवल अपना चेहरा दिखाने के लिये नही है। अर्जुन ने अपना काम किया और आखिरी में हीरोइन (विद्या बालन ) की मदद की। 

दिल को छू लेने वाले विषय पर फिल्म बनानी शुरू की निर्देशक सुजॉय घोष ने  लेकिन फिर भी बहुत सी गलतियाँ की या तो यह सब ओवर कॉन्फिडेंस की वजह से हो गया कि वो और विद्या कुछ भी कर सकते हैं। कुछ दृश्यों की जरूरत नही थी जैसे इण्द्रजीत सिंह और उसकी पत्नी के सेक्स सीन और विद्या सिन्हा और उसके प्रेमी के सेक्स सीन। 

फिल्म में सभी कलाकारों ने अच्छा काम किया है अगर आप विद्या बालन के प्रशंसक हैं तो फिल्म जरूर देखें बस  है  तुलना फिल्म  "कहानी"  कदापि मत कीजियेगा नही तो आप फिल्म का आंनद नही उठा पायेगें।