बुधवार, 16 सितंबर 2020

एक अच्छी कोशिश साइंस फिक्शन फ़िल्म बनाने की ---

हिंदी फिल्म --   कार्गो  

 रिलीज़ --  ९ सितम्बर  को नेट फ्लिक्स पर 

 बैनर -- फंडामेंटल पिक्चर्स , इलेक्ट्रिक फिल्म्स 

निर्माता -- नवीन शेट्टी , श्लोक शर्मा , आरती  कदव , अनुराग कश्यप 

लेखक -- निर्देशक -- आरती  कदव 

  कलाकार -- विक्रांत मैसी ,  श्वेता त्रिपाठी 

संगीत -- शेजान शेख 

इस साइंस फिक्शन फिल्म "कार्गो "की कहानी कुछ नयी है। इसे देखने में मज़ा आता है। कहीं भी दिल और दिमाग भटकता नहीं है।  हाँ एक बात और भी है कि इस फिल्म को बहुत ही ध्यान से देखना पड़ता है।नहीं तो कई बार फिल्म को समझने में थोड़ी मुश्किल भी आती है। 

इस फिल्म की कहानी में समय सन २०२७ दिखाया गया है। कहानी है मरे हुए लोगों को रिफ्रेश करके वापस धरती में भेजने की।  राक्षसों और मनुष्यों ने मिलकर एक ‘ पोस्ट डैथ ट्रांसपोर्टेशन सर्विस’ पुष्पक ६३४-ए नाम की संस्था बनाई है। मरे हुए इंसानों को ही "कार्गो" का नाम दिया गया है। मरने के बाद जब इंसान " पुष्पक ६३४ -ए "  में पँहुचता है। वहां राक्षस प्रहस्थ  ( विक्रांत मैसी ) उसकी सारी यादें मिटा देते हैं और उसे नये जन्म के लिये फिर से धरती पर भेज देते हैं। प्रहस्थ वहां करीब ७५ सालों से काम कर रहे हैं। बाद में उनकी सहायता के लिए उनकी एक सहयोगी युविष्का शेखर ( श्वेता त्रिपाठी ) आती हैं।  

निर्देशिका आरती कदव की यह पहली फीचर फिल्म है हालाँकि इससे पहले उन्होंने तीन शार्ट फ़िल्में बनाई हैं। २०१० में गुलमोहर ,२०१३ में उस पार और २०१६ में टाइम मशीन आदि। आरती की पहली फिल्म है लेकिन फिर भी उन्होंने अच्छी फिल्म बनाई है।साइंस फिक्शन फिल्म बनाने की उनकी कोशिश अच्छी है। हाँ कुछ कमियाँ हैं फिल्म में।  जैसे प्रहस्थ की घाव भरने की मशीन सारी फिल्म में ख़राब ही रहती है। इसके बदले उसे दूसरी मशीन सारी फिल्म में नहीं मिली जबकि यह फिल्म साइंस फिक्शन है। इसी तरह श्वेता त्रिपाठी भी टॉर्च और कपड़ो के दो टुकड़ो से मृत व्यक्ति के घावों को भरती है। अतिथि भूमिका में कोंकना सेन भी  फ़िल्म में हैं। अभिनेता विक्रांत मैसी और श्वेता त्रिपाठी दोनों ही अच्छे कलाकार हैं। जिस फिल्म में ये दोनों कलाकार हों तो वो फिल्म को एक बार तो देखना ही चाहिये।आम तौर पर साइंस फिक्शन फिल्में बहुत मंहगी होती हैं। जबकी कार्गो का बजट ज्यादा नही है । सीमित साधनों में बनी १घण्टे ५० मिनट की यह फ़िल्म दर्शकों को बांधे रखने में पूरी तरह से कामयाब है।

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