मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

दर्शकों को बोर करती है यह फिल्म "दुर्गामती "


 हिंदी फिल्म --  दुर्गामती द मिथ 

रिलीज -- ११ दिसम्बर को अमेजन प्राइम वीडियो पर 
बैनर -- टी सीरीज़ , केप ऑफ़ गुड फिल्म्स , अबुंदन्त्या एंटरटेनमेन्ट 
निर्देशक -- जी अशोक 
निर्माता -- विक्रम मल्होत्रा , भूषण
कुमार , कृष्ण कुमार और अक्षय कुमार 

२०१८ में आयी तमिल - तेलुगु फिल्म "भागमती " की हिंदी रीमेक 
कलाकार -- भूमि पेडनेकर , अरशद वारसी , जीशु सेनगुप्ता , माही गिल , करण कपाड़िया 
संगीत -- तनिष्क बागची , नमन अधिकारी , अभिनव शर्मा , मालिनी अवस्थी 
बैक ग्राउंड संगीत -- जैक्स बिजॉय 
गीत -- दीप्ती मिश्रा और  तनिष्क बागची 
आवाज़ -- बी प्राक , अल्तमिश फरीदी , मालिनी अवस्थी 

  २०१८ में आयी तमिल - तेलुगु फिल्म "भागमती " की हिंदी रीमेक  फिल्म है "दुर्गामती।" इस हॉरर फिल्म के निर्देशक वही जी अशोक है जो कि फिल्म "भागमती" के थे। "भागमती " फिल्म को दर्शकों ने बेहद पसंद किया था जबकि हिंदी फिल्म "दुर्गामती " के बारें में ऐसा कुछ भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि फिल्म बहुत ही धीमी है। आइये सबसे पहले जानते हैं फिल्म की कहानी क्या है। 

फिल्म की कहानी एक राज्य के जल संसाधन मंत्री ईश्वर( अरशद वारसी) पर है, वह सत्ता हासिल करना चाहता है। इस पूरे सत्ता के खेल में, एक आम सी लड़की कैसे मोहरा बनती है, और किस तरह उसका इस्तेमाल होता है, यही फिल्म की कहानी है। ईश्वर का पर्दा फाश करने के लिए, सीबीआई ईश्वर की दस सालों तक सचिव रही चंचल चौहान से सवाल जवाब करते हैं जबकि आईएएस अफसर चंचल चौहान ( भूमि पेंडेकर) पर, अपने मंगेतर ( करण कपाड़िया) की हत्या का आरोप है, वह जेल में है। चंचल से पूछताछ करने के लिए शहर से बाहर  एक सुनसान जंगल के बीच एक महल में उसे रखा जाता है, वहां से शुरू होती है दुर्गामती की कहानी। कौन है दुर्गामती, उस महल का राज क्या है।  यही है इस फिल्म की कहानी। 

समीक्षा --  पेड़ पर लटकती लाश, सीढ़ियों पर गिरी महिला और जान बचाने के लिए भागते ढेर सारे बच्चे। आत्मा सभी कुछ दिखाया है फिल्म में। लेकिन फिर भी फिल्म पूरी तरह बेअसर ।  बहुत ही धीमी फिल्म है , दर्शक सोचते रह जाते हैं कि अभी कुछ होगा, अभी कुछ होगा लेकिन निराशा ही हाथ लगती है।  दर्शकों को डराने की पूरी कोशिश की निर्देशक ने लेकिन कुछ भी सम्भव नहीं हुआ।  न डर है इस फिल्म  में और नहीं किसी भी तरह के कोई भाव। अभिनेता अरशद वारसी ने पता नहीं क्या सोच यह भूमिका स्वीकार की। खलनायक बने थे लेकिन लग नहीं रहे थे। माही गिल की भाषा भी कुछ अजीब थी। फिल्म में सताक्षी गाँगुली यानि बंगाली बनी थी लेकिन लहजा बिलकुल पंजाबी था। फिल्म शरू हुई तो लग रहा था कि दक्षिण की कोई हिंदी डब फिल्म देख रहे हैं।  किसी भी प्रकार के कोई भाव नहीं दिखाई दे रहे थे।  करण कपाड़िया टिवंकल खन्ना के मौसेरे भाई  हैं शायद इसी वजह से इस फिल्म हैं। अभिनेत्री भूमि पेडनेकर अभी ऐसी हीरोइन नहीं है जो कि अपने बल पर किसी भी फिल्म को चला पायें। 

पता नहीं निर्देशक जी अशोक की फिल्म "भागमती " कैसे हिट हुई जबकि हिंदी फिल्म "दुर्गामती" भी उन्होंने ही बनाई है और एक - एक सीन भी भागमती की कॉपी किया गया है तब भी हिंदी दर्शकों ने "दुर्गामती " को नकार दिया। शायद तमिल - तेलुगु और हिंदी दर्शकों को पसंद अलग होती है।  पिछले दिनों आयी अक्षय कुमार की फिल्म "लक्ष्मी " को भी दृश्कों ने पसंद नहीं किया था। अक्षय कुमार ने क्या सोच कर इस फिल्म को बनाया। समझ नहीं आया। कुल मिला कर दर्शकों को बोर करती है यह फिल्म। 

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