हिंदी फिल्म -- कुली नंबर -१
रिलीज़ -- २५ दिसम्बर को अमेजन प्राइम विडियो पर
बैनर -- पूजा एंटरटेनमेन्ट
निर्माता -- वाशु भगनानी , जैकी भगनानी , दीपशिखा भगनानी
निर्देशक -- डेविड धवन
कलाकार -- वरुण धवन ,सारा अली खान , परेश रावल ,शिखा तलसानिया , भारती अचरेकर , जॉनी लीवर , राजपाल यादव , जावेद जाफरी
गीत -- दानिश साबरी , समीर अंजान ,शब्बीर अहमद , इक्का , रश्मि विराग , फरहाद सामजी
संगीत -- तनिष्क बागची ,सलीम सुलेमान , जावेद - मोहसिन ,लीजो जॉर्ज , डी जे चीता
आवाज -- नेहा कक्कड़ ,देव नेगी , जावेद -- मोहसिन , चंदना दीक्षित , अभिजीत भट्टाचार्य ,मोनाली ठाकुर ,इक्का , उदित नारायण , अल्का याग्निक , राज पंडित , रीनीसा दास , ऐश किंग
१९९५ की लोकप्रिय फिल्म "कुली नंबर - १ " की रीमेक फिल्म है यह फिल्म "कुली नंबर - १।" पिछली फिल्म में गोविंदा - करिश्मा कपूर , गोविंदा और कादर खान की लोकप्रिय जोड़ी थी । इसके अलावा शक्ति कपूर और सदाशिव अमरापुरकर भी थे फिल्म में ।नई फिल्म "कुली नंबर - १" की कहानी हूबहू पुरानी फिल्म की कहानी है। निर्देशक डेविड धवन और लेखक
रूमी जाफ़री ने २५ साल बाद भी इस फिल्म में कुछ भी बदलाव नहीं किये हैं और नहीं किसी भी प्रकार की मेहनत नहीं की है फिल्म में । बिल्कुल वही सीन और संवाद है फिल्म में। हाँ बस सीन बहुत भव्य हैं।
कहानी -- कैसे एक पंडित एक अमीर आदमी से बदला लेने के लिए धोखे से एक कुली से उसकी लड़की की शादी करवा देता है। सच्चाई पता चलने पर थोड़ा कुछ हँगामा होता है और फिर बाद में हमेशा की तरह सब ठीक हो जाता है यानि हैप्पी एंडिंग।
समीक्षा --- अभिनेता वरुण धवन अच्छे अभिनेता है लेकिन गोविंदा की रीमेक फिल्म में काम करना उनके लिए थोड़ा मुश्किल है क्योंकि गोविंदा जैसा हास्य अभिनय करना हर किसी के बस की बात नहीं है। इस फिल्म में भी वरुण के साथ यही हुआ है। निर्देशक ने कोशिश की कि पहली फिल्म की तरह इस फिल्म को भी हास्य बनाया जाये लेकिन उनके हाथ असफलता ही लगी है और दर्शक भी निराश हुए हैं । पिछली फिल्म में गोविंदा और कादर खान के संवाद सुनकर बहुत मज़ा आता था ख़ास कर जब उन दृश्यों में जब वो गोविंदा के जुड़वाँ भाई बने गोविंदा को वो दारू पिलाते हैं ,अपने घर में रखते हैं और अपनी दूसरी बेटी के साथ उनकी शादी के लिए क्या कुछ नहीं करते। इस फिल्म में कादर खान की जगह परेश रावल हैं लेकिन वो भी दर्शकों को निराश ही करते हैं। वरुण धवन ने कई कलाकारों की मिमिक्री की है जो कुछ समय के लिए तो
तो अच्छी लगती है लेकिन बाद में जब मिथुन चक्रवर्ती की ही तरह बोलने लगते हैं तब दर्शक हँसते नहीं बल्कि बोर होते हैं। परेश रावल और वरुण के बीच वो कैमिस्ट्री भी नहीं है जो कि गोविंदा और कादर खान के बीच थी। सारा अली देखने में सुन्दर लगी है। डाँस भी अच्छा किया है लेकिन अभिनय बहुत ही बुरा करती हैं। राजपाल यादव , शिखा तलसानिया , साहिल वैद्य , जॉनी लीवर , हेमंत पांडेय ठीक ठाक लगे हैं। पिछली फिल्म में अभिनेता टीकू तलसानिया ने काम किया था जबकि इस फिल्म में उनकी बेटी ने काम किया है।
गीत - संगीत ठीक है लेकिन " मिर्ची वाला " गीत बिलकुल भी अच्छा नहीं है जबकि पिछली फिल्म में यही गीत सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ था। वरुण और सारा ने डांस भी अच्छा किया है। पहले फिल्म के मुकाबले यह फिल्म ज्यादा भव्य लगती है। कुल मिलाकर अगर आप पिछली फ़िल्म की तरह इसे देखेगें तो निराशा ही हाथ लगेगी।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें