सोमवार, 25 जनवरी 2016

गणतंत्र दिवस का माहौल है तो फिल्म "एयरलिफ्ट" को आप देख सकते हैं।

पी वी आइकॉन, वर्सोवा अँधेरी वेस्ट मुंबई।  फिल्म "एयरलिफ्ट" दोपहर ११ - ४५ का शो टाइम , दर्शक ४० % . 
निर्देशक राजा मेनन और अभिनेता अक्षय कुमार और फिल्म के अन्य निर्माताओं की तारीफ करनी पड़ेगी कि उन्होंने ऐसे दौर में एक अच्छी फिल्म "एयरलिफ्ट " बनाने के बारे में सोचा।  जब क्या कूल हैं हम और मस्तीजादे  जैसी बन रही हों। कई बार तो ऐसी फ़िल्में  "एयरलिफ्ट" जैसी अच्छी फिल्मों को कमाई  में पीछे छोड़ जाती हैं। 
सन १९९० में जब  ईराक ने कुवैत पर कब्ज़ा कर लिया था ऐसे समय में कुवैत में करीब १ लाख ७० हज़ार फँसे भारतीयों को किस तरह वहाँ से बचाया गया, यही है फिल्म की भावुक कर देने वाली कहानी। जब आप अपने देश से बहुत दूर किसी विपत्ति में होते हैं तब आपको समझ में आता है अपने देश और इसके झण्डे का क्या महत्व होता है.
इस फिल्म के निर्माता अपनी फिल्म "एयरलिफ्ट" के बारें में कह रहे हैं कि उनकी यह फिल्म असली जिंदगी  की कहानी है जबकि कुवैत से बचकर भारत आये उनमें से कुछ लोगों का कहना है कि यह फिल्म ७० प्रतिशत असत्य है  रंजीत कत्याल नाम का कोई भी व्यक्ति इस मिशन में था ही नहीं।  क्या झूठ है क्या सच हम इसके चक्कर में नही फँसेगें।  
हम तो इस फिल्म की  खासियत के बारें में बात करेगें कि अगर यह फिल्म ७० % असत्य है तो भी कहानी अच्छी है, दिल को छूती है।  कैसे सिर्फ एक इंसान के प्रयत्नों की वजह से १ लाख ७० हज़ार लोगों का जीवन बचता है ? 
फिल्म का गीत -
संगीत भी अच्छा है।  कानों को सुकून देने वाला है , वैसे इस तरह की फिल्मों में गीत - संगीत न हो तो भी चलता है।
हर फिल्म की तरह इस फिल्म में खामियाँ भी हैं लेकिन फिर भी देश में गणतंत्र दिवस का माहौल है तो इस फिल्म को आप देख सकते हैं। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें