मंगलवार, 29 दिसंबर 2020

दर्शक हँसते नहीं बल्कि बोर होते हैं कुली नंबर १ देखकर 

हिंदी फिल्म -- कुली नंबर -१  
रिलीज़ -- २५ दिसम्बर को अमेजन प्राइम विडियो  पर 
बैनर  -- पूजा एंटरटेनमेन्ट 
निर्माता -- वाशु भगनानी , जैकी भगनानी , दीपशिखा भगनानी 
निर्देशक -- डेविड धवन 
कलाकार -- वरुण धवन ,सारा अली खान , परेश रावल ,शिखा तलसानिया , भारती अचरेकर , जॉनी लीवर , राजपाल यादव , जावेद जाफरी 
गीत -- दानिश साबरी , समीर अंजान ,शब्बीर अहमद , इक्का , रश्मि विराग , फरहाद सामजी 
संगीत -- तनिष्क बागची ,सलीम सुलेमान , जावेद - मोहसिन ,लीजो जॉर्ज , डी जे चीता 
आवाज -- नेहा कक्कड़ ,देव नेगी , जावेद -- मोहसिन , चंदना दीक्षित , अभिजीत भट्टाचार्य ,मोनाली ठाकुर ,इक्का , उदित नारायण , अल्का याग्निक , राज पंडित , रीनीसा दास , ऐश किंग 

१९९५ की लोकप्रिय फिल्म "कुली नंबर - १ " की रीमेक फिल्म है यह फिल्म "कुली नंबर - १।" पिछली फिल्म में गोविंदा - करिश्मा कपूर , गोविंदा और कादर खान की लोकप्रिय जोड़ी थी । इसके अलावा शक्ति कपूर और सदाशिव अमरापुरकर भी थे फिल्म में ।नई फिल्म  "कुली नंबर - १" की कहानी हूबहू पुरानी फिल्म की कहानी है।  निर्देशक डेविड धवन और लेखक 
रूमी जाफ़री ने २५ साल बाद भी इस फिल्म में कुछ भी बदलाव नहीं किये हैं और नहीं किसी भी प्रकार की मेहनत नहीं की है फिल्म में ।  बिल्कुल वही सीन और संवाद है फिल्म में। हाँ बस सीन बहुत भव्य हैं। 
कहानी -- कैसे एक पंडित एक अमीर आदमी से बदला लेने के लिए धोखे से एक कुली से उसकी लड़की की शादी करवा देता है। सच्चाई पता चलने पर थोड़ा कुछ हँगामा होता है और फिर बाद में हमेशा की तरह सब ठीक हो जाता है यानि हैप्पी एंडिंग। 
समीक्षा --- अभिनेता वरुण धवन अच्छे अभिनेता है लेकिन गोविंदा की रीमेक  फिल्म में काम करना उनके लिए थोड़ा मुश्किल है क्योंकि गोविंदा जैसा हास्य अभिनय करना हर किसी के बस की बात नहीं है। इस फिल्म में भी वरुण के साथ यही हुआ है। निर्देशक ने कोशिश की कि पहली फिल्म की तरह इस फिल्म को भी हास्य बनाया जाये लेकिन उनके हाथ असफलता ही लगी है और दर्शक भी निराश हुए हैं ।  पिछली फिल्म में गोविंदा और कादर खान के संवाद सुनकर बहुत मज़ा आता था ख़ास कर जब उन दृश्यों में जब वो गोविंदा के जुड़वाँ भाई बने गोविंदा को वो दारू पिलाते हैं ,अपने घर में रखते हैं और अपनी दूसरी बेटी के साथ उनकी शादी के लिए क्या कुछ नहीं करते। इस फिल्म में कादर खान की जगह परेश रावल हैं लेकिन वो भी दर्शकों को निराश ही करते हैं। वरुण धवन ने कई कलाकारों की मिमिक्री की है जो कुछ समय के लिए तो 
तो अच्छी लगती है लेकिन बाद में जब मिथुन चक्रवर्ती की ही तरह बोलने लगते हैं तब दर्शक हँसते नहीं बल्कि बोर होते हैं। परेश रावल और वरुण के बीच वो कैमिस्ट्री भी नहीं है  जो कि गोविंदा और कादर खान के बीच थी।  सारा अली देखने में सुन्दर लगी है।  डाँस भी अच्छा किया है लेकिन अभिनय बहुत ही बुरा करती हैं।  राजपाल यादव , शिखा तलसानिया , साहिल वैद्य , जॉनी लीवर , हेमंत पांडेय ठीक ठाक लगे हैं। पिछली फिल्म में अभिनेता टीकू तलसानिया ने काम किया था जबकि इस फिल्म में उनकी बेटी ने काम किया है।  
गीत - संगीत ठीक है लेकिन " मिर्ची वाला " गीत बिलकुल भी अच्छा नहीं है जबकि पिछली फिल्म में यही गीत सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ था। वरुण और सारा ने डांस भी अच्छा किया है।  पहले फिल्म के मुकाबले यह फिल्म ज्यादा भव्य लगती है। कुल मिलाकर अगर आप पिछली फ़िल्म की तरह इसे देखेगें तो निराशा ही हाथ लगेगी। 

मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

दर्शकों को बोर करती है यह फिल्म "दुर्गामती "


 हिंदी फिल्म --  दुर्गामती द मिथ 

रिलीज -- ११ दिसम्बर को अमेजन प्राइम वीडियो पर 
बैनर -- टी सीरीज़ , केप ऑफ़ गुड फिल्म्स , अबुंदन्त्या एंटरटेनमेन्ट 
निर्देशक -- जी अशोक 
निर्माता -- विक्रम मल्होत्रा , भूषण
कुमार , कृष्ण कुमार और अक्षय कुमार 

२०१८ में आयी तमिल - तेलुगु फिल्म "भागमती " की हिंदी रीमेक 
कलाकार -- भूमि पेडनेकर , अरशद वारसी , जीशु सेनगुप्ता , माही गिल , करण कपाड़िया 
संगीत -- तनिष्क बागची , नमन अधिकारी , अभिनव शर्मा , मालिनी अवस्थी 
बैक ग्राउंड संगीत -- जैक्स बिजॉय 
गीत -- दीप्ती मिश्रा और  तनिष्क बागची 
आवाज़ -- बी प्राक , अल्तमिश फरीदी , मालिनी अवस्थी 

  २०१८ में आयी तमिल - तेलुगु फिल्म "भागमती " की हिंदी रीमेक  फिल्म है "दुर्गामती।" इस हॉरर फिल्म के निर्देशक वही जी अशोक है जो कि फिल्म "भागमती" के थे। "भागमती " फिल्म को दर्शकों ने बेहद पसंद किया था जबकि हिंदी फिल्म "दुर्गामती " के बारें में ऐसा कुछ भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि फिल्म बहुत ही धीमी है। आइये सबसे पहले जानते हैं फिल्म की कहानी क्या है। 

फिल्म की कहानी एक राज्य के जल संसाधन मंत्री ईश्वर( अरशद वारसी) पर है, वह सत्ता हासिल करना चाहता है। इस पूरे सत्ता के खेल में, एक आम सी लड़की कैसे मोहरा बनती है, और किस तरह उसका इस्तेमाल होता है, यही फिल्म की कहानी है। ईश्वर का पर्दा फाश करने के लिए, सीबीआई ईश्वर की दस सालों तक सचिव रही चंचल चौहान से सवाल जवाब करते हैं जबकि आईएएस अफसर चंचल चौहान ( भूमि पेंडेकर) पर, अपने मंगेतर ( करण कपाड़िया) की हत्या का आरोप है, वह जेल में है। चंचल से पूछताछ करने के लिए शहर से बाहर  एक सुनसान जंगल के बीच एक महल में उसे रखा जाता है, वहां से शुरू होती है दुर्गामती की कहानी। कौन है दुर्गामती, उस महल का राज क्या है।  यही है इस फिल्म की कहानी। 

समीक्षा --  पेड़ पर लटकती लाश, सीढ़ियों पर गिरी महिला और जान बचाने के लिए भागते ढेर सारे बच्चे। आत्मा सभी कुछ दिखाया है फिल्म में। लेकिन फिर भी फिल्म पूरी तरह बेअसर ।  बहुत ही धीमी फिल्म है , दर्शक सोचते रह जाते हैं कि अभी कुछ होगा, अभी कुछ होगा लेकिन निराशा ही हाथ लगती है।  दर्शकों को डराने की पूरी कोशिश की निर्देशक ने लेकिन कुछ भी सम्भव नहीं हुआ।  न डर है इस फिल्म  में और नहीं किसी भी तरह के कोई भाव। अभिनेता अरशद वारसी ने पता नहीं क्या सोच यह भूमिका स्वीकार की। खलनायक बने थे लेकिन लग नहीं रहे थे। माही गिल की भाषा भी कुछ अजीब थी। फिल्म में सताक्षी गाँगुली यानि बंगाली बनी थी लेकिन लहजा बिलकुल पंजाबी था। फिल्म शरू हुई तो लग रहा था कि दक्षिण की कोई हिंदी डब फिल्म देख रहे हैं।  किसी भी प्रकार के कोई भाव नहीं दिखाई दे रहे थे।  करण कपाड़िया टिवंकल खन्ना के मौसेरे भाई  हैं शायद इसी वजह से इस फिल्म हैं। अभिनेत्री भूमि पेडनेकर अभी ऐसी हीरोइन नहीं है जो कि अपने बल पर किसी भी फिल्म को चला पायें। 

पता नहीं निर्देशक जी अशोक की फिल्म "भागमती " कैसे हिट हुई जबकि हिंदी फिल्म "दुर्गामती" भी उन्होंने ही बनाई है और एक - एक सीन भी भागमती की कॉपी किया गया है तब भी हिंदी दर्शकों ने "दुर्गामती " को नकार दिया। शायद तमिल - तेलुगु और हिंदी दर्शकों को पसंद अलग होती है।  पिछले दिनों आयी अक्षय कुमार की फिल्म "लक्ष्मी " को भी दृश्कों ने पसंद नहीं किया था। अक्षय कुमार ने क्या सोच कर इस फिल्म को बनाया। समझ नहीं आया। कुल मिला कर दर्शकों को बोर करती है यह फिल्म। 

बुधवार, 16 सितंबर 2020

एक अच्छी कोशिश साइंस फिक्शन फ़िल्म बनाने की ---

हिंदी फिल्म --   कार्गो  

 रिलीज़ --  ९ सितम्बर  को नेट फ्लिक्स पर 

 बैनर -- फंडामेंटल पिक्चर्स , इलेक्ट्रिक फिल्म्स 

निर्माता -- नवीन शेट्टी , श्लोक शर्मा , आरती  कदव , अनुराग कश्यप 

लेखक -- निर्देशक -- आरती  कदव 

  कलाकार -- विक्रांत मैसी ,  श्वेता त्रिपाठी 

संगीत -- शेजान शेख 

इस साइंस फिक्शन फिल्म "कार्गो "की कहानी कुछ नयी है। इसे देखने में मज़ा आता है। कहीं भी दिल और दिमाग भटकता नहीं है।  हाँ एक बात और भी है कि इस फिल्म को बहुत ही ध्यान से देखना पड़ता है।नहीं तो कई बार फिल्म को समझने में थोड़ी मुश्किल भी आती है। 

इस फिल्म की कहानी में समय सन २०२७ दिखाया गया है। कहानी है मरे हुए लोगों को रिफ्रेश करके वापस धरती में भेजने की।  राक्षसों और मनुष्यों ने मिलकर एक ‘ पोस्ट डैथ ट्रांसपोर्टेशन सर्विस’ पुष्पक ६३४-ए नाम की संस्था बनाई है। मरे हुए इंसानों को ही "कार्गो" का नाम दिया गया है। मरने के बाद जब इंसान " पुष्पक ६३४ -ए "  में पँहुचता है। वहां राक्षस प्रहस्थ  ( विक्रांत मैसी ) उसकी सारी यादें मिटा देते हैं और उसे नये जन्म के लिये फिर से धरती पर भेज देते हैं। प्रहस्थ वहां करीब ७५ सालों से काम कर रहे हैं। बाद में उनकी सहायता के लिए उनकी एक सहयोगी युविष्का शेखर ( श्वेता त्रिपाठी ) आती हैं।  

निर्देशिका आरती कदव की यह पहली फीचर फिल्म है हालाँकि इससे पहले उन्होंने तीन शार्ट फ़िल्में बनाई हैं। २०१० में गुलमोहर ,२०१३ में उस पार और २०१६ में टाइम मशीन आदि। आरती की पहली फिल्म है लेकिन फिर भी उन्होंने अच्छी फिल्म बनाई है।साइंस फिक्शन फिल्म बनाने की उनकी कोशिश अच्छी है। हाँ कुछ कमियाँ हैं फिल्म में।  जैसे प्रहस्थ की घाव भरने की मशीन सारी फिल्म में ख़राब ही रहती है। इसके बदले उसे दूसरी मशीन सारी फिल्म में नहीं मिली जबकि यह फिल्म साइंस फिक्शन है। इसी तरह श्वेता त्रिपाठी भी टॉर्च और कपड़ो के दो टुकड़ो से मृत व्यक्ति के घावों को भरती है। अतिथि भूमिका में कोंकना सेन भी  फ़िल्म में हैं। अभिनेता विक्रांत मैसी और श्वेता त्रिपाठी दोनों ही अच्छे कलाकार हैं। जिस फिल्म में ये दोनों कलाकार हों तो वो फिल्म को एक बार तो देखना ही चाहिये।आम तौर पर साइंस फिक्शन फिल्में बहुत मंहगी होती हैं। जबकी कार्गो का बजट ज्यादा नही है । सीमित साधनों में बनी १घण्टे ५० मिनट की यह फ़िल्म दर्शकों को बांधे रखने में पूरी तरह से कामयाब है।