रविवार, 7 जून 2015

दिल नही धड़का -- "दिल धड़कने दो" में

जोया अख्तर की ताज़ा तरीन रिलीज़ फिल्म "दिल धड़कने दो " सिने मैक्स, वर्सोवा सुबह ११ बजे का शो , जिसमें ४० % दर्शक थे।  ११ बजे का शो था लेकिन फिल्म शुरू हुई करीब ११.३० पर।  दर्शक बैचेन कब फिल्म शुरू हो , थक गये परफ्यूम , क्रीम और भी कई तरह के विज्ञापन देखकर आखिरकार  फिल्म शुरू हुई। 
फिल्म शुरू हुई एक सूत्रधार की आवाज़ के साथ जो की फिल्म की कहानी व  किरदारों परिचय कराता है , यह हैं कमल मेहरा, यह  हैं उनकी पत्नी , यह बेटा , यह बेटी, यह ये यह वो. करीब १० मिनट के बाद पता चलता है  कि कहानी सुनाने वाला मेहरा परिवार का ही कुत्ता है प्लूटो मेहरा।  इस प्लूटो की भी किस्मत खुल गयी क्योंकि इसकी आवाज़ की डबिंग की है अभिनेता आमिर खान ने।  इसने इस परिवार के सभी सदस्यों को करीब से देखा है कि कौन कैसा है ? बेजुबान होते हुए भी शुरू से अंत तक यही दर्शकों को कहानी बताता जाता है। 

क्रूज़ की सैर करने का मन हो , गॉसिप पर हंसने का मन हो या दोहरी मानसिकता देखनी हो।  अंदर से दुखी परिवार लेकिन समाज के सामने आदर्श परिवार और पति पत्नी देखने हो तो जरूर देखें यह फिल्म जिसका नाम है "दिल धड़कने दो " लेकिन फिल्म में सच कहें तो दिल कहीं भी नही धड़का , कभी धड़कन नही बढ़ी क़ि अब क्या होगा ?

ज़ोया की यह चौथी फिल्म है सबसे पहले  #लक बाय चांस # जिंदगी न मिलेगी दोबारा #बॉम्बे टाकीज़ -  शीला की जवानी और अब #दिल धड़कने दो।  इस फिल्म को देखकर ऐसा लगा की हम #करन जौहर या #सूरज बड़जात्या की कोई फिल्म देख रहे हो।  एक परिवार , उनके दोस्त , रिश्तेदार बिजनिस में घाटा , घाटे को कंट्रोल करने के लिए दोस्ती को शादी में बदलने का ड्रामा। ऐसा कहीं भी नही लगा की यह उसी निर्देशक की फिल्म है जिसने जिंदगी न मिलेगी दोबारा' बनाई थी। एक बात ओर यह भी देखना होगा कि ज़ोया पहले स्टोरी फाइनल करती है या लोकेशन क्योंकि उनकी सारी फिल्में ऐसी ही लगती हैं कि वह पहले लोकेशन स्पोंसर कराती है फिर कहानी निश्चित की जाती हैं ।  

फिल्म में हाई सोसायटी दिखाई है लेकिन फरहान अख्तर के संवाद ऐसे हैं जैसे मध्यम वर्गीय परिवार आपस में बातें करता है , उन्हें ही सबसे ज्यादा चिंता होती है समाज और लोगों की। हाई सोसायटी के लोग तो अपनी मनमानी करते हैं उन्हें कब समाज की परवाह होने लगी। ऐसे परिवार के लड़के एक डांसर से टाइम पास जरूर कर सकते हैं पर घर में नही लाते।    

 फिल्म में कुछ भावुक सीन भी हैं जिन्हें देखना अच्छा लगता है "जब सारा मेहरा परिवार एक साथ हो जाता है".  बिजनिस परिवारों में लड़का  -लड़की को बराबरी का दर्जा देने वाली बात भी अच्छी है।  #अनिल कपूर की बात आज भी निराली है , जितना जोश पहले था आज भी है , #शेफाली अच्छी अदाकारा हैं उनके कुछ सीन बेहद अच्छे हैं, #प्रिंयका और #रनवीर बहन भाई की जोड़ी अच्छी है , बाकी कलाकार जिनमे #राहुल बोस #अनुष्का , #
फ़रहान और जरीना बहाब एक्स्ट्रा जैसे लग रहे थे। 

गीत - संगीत पुराना , #शंकर #अहसान #लॉय यह क्या किया आपने, आपसे ऐसे उम्मीद नही है  
हाँ यह बात बिलकुल पक्की है कि इस फिल्म को देखकर सभी दर्शकों का क्रूज़ पर जाने का जरूर मन करेगा।  

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