वेब सीरीज -- द फैमिली मैन -२
ओ टी टी -- अमेजन प्राइम वीडियो
निर्देशक -- राज निदिमोरू और कृष्णा डी के ( राज एंड डीके )
लेखक -- राज निदिमोरू , कृष्णा डी के और सुमन कुमार
कलाकार - मनोज बाजपेयी , समंथा अक्किनेनी , शारिब हाशमी , प्रियामणि , रविंद्र विजय ( मुथु ) सीमा बिस्वास , दलीप ताहिल , विपिन शर्मा , श्रीकृष्ण दयाल , शरद केलकर, राजेश बालाचंद्रन, अश्लेषा ठाकुर , दर्शन कुमार।
वेब सीरीज "द फैमिली मैन " को दर्शको ने इतना ज्यादा पसंद किया कि ४ जून २०२१ को इसका दूसरा सीजन भी प्राइम वीडियो पर आ गया जबकि पहला सीजन २० सितंबर २०१९ में आया था। जहाँ पहले सीजन में १० एपिसोड थे वहीं दूसरे सीजन में ९ एपिसोड हैं। पिछली बार की तरह ही इस बार भी भरपूर एक्शन और रोमांच दर्शकों को देखने को मिलेगा साथ ही एक नई कहानी है जिसके तार पिछले सीजन के आतंकवादी मिशन से जुड़े हुए हैं।
गैस काण्ड को अपनी असफलता मानने वाला श्रीकांत तिवारी अब टॉस्क छोड़कर एक आई टी कंपनी में नौकरी कर रहा है। जिससे वो अपने परिवार के साथ कुछ समय बिता सके। वो काम जरुर आई टी कम्पनी में करता है लेकिन उसका दिल - दिमाग अभी भी अपने देश को समर्पित है बीच बीच में वो तलपड़े से टास्क की जानकारी भी लेता रहता है। तभी उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा घटता है जिससे वो फिर मिशन से जुड़ जाता है। एक ओर श्रीकांत को अपनी बेटी को बचाना होता है तो वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री पर होने वाले अटैक की साजिश को नाकाम करना होता है। ऐसे में क्या श्रीकांत अपने मिशन के साथ-साथ अपनी बेटी को सुरक्षित घर वापस ला पाता है। यही सब दिखाया है इस सीरीज में।
कहानी --"द फैमिली मैन " के निर्देशक राज और डीके ने इस बार भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। पिछली बार श्रीकांत तिवारी की लड़ाई आतंकवादियों से थी। वहीं इस बार उनकी लड़ाई तमिल श्रीलंकन बागी सरकार से है। ये बागी खुद को क्रांतिकारी मानते है और अपने लोगों को सत्ता में लाने और मरे अपने करीबियों का बदला लेने के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार हैं। इन बागियों में एक महिला बागी है राजी (समंथा अक्किनेनी) , बचे हुए तमिल बागियों में राजी एक अकेली ऐसी पायलट है जो प्लेन उड़ाना जानती है और जो जरूरत पड़ने पर लोगों के हाथ पैर भी तोड़ - मोड़ सकती है ,उन्हें मौत के घाट उतार सकती है । इस मिशन की पूरी जिम्मेदारी उसी के कंधो पर है। प्रधानमंत्री बसु (सीमा बिस्वास) और श्रीलंका के राष्ट्रपति दोनों देश के बीच एक अहम समझौत होना है। इसके लिए श्रीलंका की सरकार बागियों के एक खास व्यक्ति की मांग करती है। प्रधानमंत्री बसु उस बागी सदस्य को ढूंढ़ने का काम एजेंसी को सौंप देती है। एजेंसी उस सदस्य को ढूंढ तो लेती है पर उसे श्रीलंका को सौंपने से पहले ही एक बम धमाके में उसकी मौत हो जाती है।इस बागी की मौत के बाद उसका भाई जो कि बागी गुट का लीडर है बुरी तरह तिलमिला जाता है और आतंकवादी समीर (दर्शन कुमार) से हाथ मिला लेता है।अब इन दोनों का मकसद अब प्रधानमंत्री बसु और श्रीलंका के राष्ट्रपति की मुलाकात को मौत में बदलने का है।
वहीं दूसरी ओर श्रीकांत तिवारी अब एक आईटी फर्म में काम करने लगा है। लेकिन उसके मन में अब भी एजेंसी में चल रहे मिशन को जानने की उत्सुकता लगी रहती है। तभी कुछ ऐसा घटता है कि तिवारी फिर से मिशन से जुड़ जाता है।
अभिनय कैसा है ?
मनोज बाजपेयी के बारें में क्या कह सकते हैं हमेशा की तरह ,उन्होंने शानदार काम किया है हाँ गालियाँ बहुत दी है इसमें उन्होंने। दर्शक इस सीरीज को उनके ही कारण देखते हैं। समंथा अक्किनेनी ने तमिल बागी के रूप में बहुत शानदार काम किया है। एक्शन बहुत ही उम्दा किये हैं उन्होंने। उन्हें शायद इस सीरीज में इसलिए लिया है जिससे इस शो को तमिल और तेलुगु दर्शक भी मिले और दूसरी क्या वजह हो सकती है उन्हें इस सीरीज में लेने की ,समझ नहीं आया क्योंकि हिंदी फिल्मों के दर्शक तो शायद ही उन्हें अच्छे से पहचानते हैं। उस पर भी उन्हें काले रंग का दिखाया है तो और भी मुश्किल हैं उन्हें पहचानना। जे के तलपड़े के रूप में शारिब हाशमी ने उम्दा काम किया है। शारिब ने वेब शो 'असुर' में भी अच्छा काम किया था। मुथु बने रविन्द्र विजय ने भी दर्शकों को अपने अभिनय से प्रभावित किया है।शरद केलकर ने क्यों इस सीरीज में काम किया पता नहीं। ९ एपिसोड में मुश्किल से वो २ - ३ बार ही दिखे हैं। पिछली बार ही कुछ ऐसा ही था। शरद से ज्यादा से तो इसमें श्रीकांत तिवारी की बेटी बनी धृति तिवारी ( अश्लेषा ठाकुर ) का काम है। अश्लेषा ने काम भी अच्छा किया है प्रियमणि, सीमा बिस्वास, दलीप ताहिल, दर्शन कुमार ,सनी हिंदुजा सभी ने अपना अपना काम बखूबी किया है।
निर्देशन--
राज एंड डीके ने "फॅमिली मैन - २ " को भी बहुत ही अच्छे तरीके से निर्देशित किया है। हाँ इस बार कुछ एपिसोड को निर्देशित करने का मौका संवाद लेखक सुपर्ण एस वर्मा को भी मिला है। जब यह शो प्रसारित हुआ था तब शो के शुरू में तमिल भाषा को समझने में थोड़ी परेशानी जरूर हुई थी लेकिन बाद में दर्शकों की परेशानी को देखते हुए हिंदी में भी सब टाइटल आ गये हैं जिससे अब दर्शकों को यह समस्या दूर हो गई है। कहीं कोई बोरियत नहीं होती इस सीरीज को देखने में। अगर आपने पिछला सीजन नहीं देखा तो उससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इस बार नया मिशन दिखाया गया है। लेकिन आप को पहला सीजन भी देखना चाहिए। शरू से आखिरी तक बिना किसी रूकावट के आप दोनों ही सीजन देखना पसंद करेंगे।
वेब सीरीज -- द फैमिली मैन -२
ओ टी टी -- अमेजन प्राइम वीडियो
निर्देशक -- राज निदिमोरू और कृष्णा डी के ( राज एंड डीके )
लेखक -- राज निदिमोरू , कृष्णा डी के और सुमन कुमार
कलाकार - मनोज बाजपेयी , समंथा अक्किनेनी , शारिब हाशमी , प्रियामणि , रविंद्र विजय ,सीमा बिस्वास , दलीप ताहिल , विपिन शर्मा , श्रीकृष्ण दयाल , शरद केलकर, राजेश बालाचंद्रन, अश्लेषा ठाकुर , दर्शन कुमार।
वेब सीरीज "द फैमिली मैन " को दर्शको ने इतना ज्यादा पसंद किया कि ४ जून २०२१ को इसका दूसरा सीजन भी प्राइम वीडियो पर आ गया जबकि पहला सीजन २० सितंबर २०१९ में आया था। जहाँ पहले सीजन में १० एपिसोड थे वहीं दूसरे सीजन में ९ एपिसोड हैं। पिछली बार की तरह ही इस बार भी भरपूर एक्शन और रोमांच दर्शकों को देखने को मिलेगा साथ ही एक नई कहानी है जिसके तार पिछले सीजन के आतंकवादी मिशन से जुड़े हुए हैं।
गैस काण्ड को अपनी असफलता मानने वाला श्रीकांत तिवारी अब टॉस्क छोड़कर एक आई टी कंपनी में नौकरी कर रहा है। जिससे वो अपने परिवार के साथ कुछ समय बिता सके। वो काम जरुर आई टी कम्पनी में करता है लेकिन उसका दिल - दिमाग अभी भी अपने देश को समर्पित है बीच बीच में वो तलपड़े से टास्क की जानकारी भी लेता रहता है। तभी उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा घटता है जिससे वो फिर मिशन से जुड़ जाता है। एक ओर श्रीकांत को अपनी बेटी को बचाना होता है तो वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री पर होने वाले अटैक की साजिश को नाकाम करना होता है। ऐसे में क्या श्रीकांत अपने मिशन के साथ-साथ अपनी बेटी को सुरक्षित घर वापस ला पाता है। यही सब दिखाया है इस सीरीज में।
कहानी --"द फैमिली मैन " के निर्देशक राज और डीके ने इस बार भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। पिछली बार श्रीकांत तिवारी की लड़ाई आतंकवादियों से थी। वहीं इस बार उनकी लड़ाई तमिल श्रीलंकन बागी सरकार से है। ये बागी खुद को क्रांतिकारी मानते है और अपने लोगों को सत्ता में लाने और अपने करीबियों का बदला लेने के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार हैं। इन बागियों में एक महिला बागी है राजी (समंथा अक्किनेनी) , बचे हुए तमिल बागियों में राजी एक अकेली ऐसी पायलट है जो प्लेन उड़ाना जानती है और जो जरूरत पड़ने पर लोगों के हाथ पैर भी तोड़ - मोड़ सकती है ,उन्हें मौत के घाट उतार सकती है । इस मिशन की पूरी जिम्मेदारी उसी के कंधो पर है। प्रधानमंत्री बसु (सीमा बिस्वास) और श्रीलंका के राष्ट्रपति दोनों देश के बीच एक अहम समझौत होना है। इसके लिए श्रीलंका की सरकार बागियों के एक खास व्यक्ति की मांग करती है। प्रधानमंत्री बसु उस बागी सदस्य को ढूंढ़ने का काम एजेंसी को सौंप देती है। एजेंसी उस सदस्य को ढूंढ तो लेती है पर उसे श्रीलंका को सौंपने से पहले ही एक बम धमाके में उसकी मौत हो जाती है।इस बागी की मौत के बाद उसका भाई जो कि बागी गुट का लीडर है बुरी तरह तिलमिला जाता है और आतंकवादी समीर (दर्शन कुमार) से हाथ मिला लेता है।अब इन दोनों का मकसद अब प्रधानमंत्री बसु और श्रीलंका के राष्ट्रपति की मुलाकात को मौत में बदलने का है।
वहीं दूसरी ओर श्रीकांत तिवारी अब एक आईटी फर्म में काम करने लगा है। लेकिन उसके मन में अब भी एजेंसी में चल रहे मिशन को जानने की उत्सुकता लगी रहती है। तभी कुछ ऐसा घटता है कि तिवारी फिर से मिशन से जुड़ जाता है।
अभिनय --
मनोज बाजपेयी के बारें में क्या कह सकते हैं हमेशा की तरह ,उन्होंने शानदार काम किया है हाँ गालियाँ बहुत दी है इसमें उन्होंने। दर्शक इस सीरीज को उनके ही कारण देखते हैं। समंथा अक्किनेनी ने तमिल बागी के रूप में बहुत शानदार काम किया है। एक्शन बहुत ही उम्दा किये हैं उन्होंने। उन्हें शायद इस सीरीज में इसलिए लिया है जिससे इस शो को तमिल और तेलुगु दर्शक भी मिले और दूसरी क्या वजह हो सकती है उन्हें इस सीरीज में लेने की ,समझ नहीं आया क्योंकि हिंदी फिल्मों के दर्शक तो शायद ही उन्हें अच्छे से पहचानते हैं। उस पर भी उन्हें काले रंग का दिखाया है तो और भी मुश्किल हैं उन्हें पहचानना। जे के तलपड़े के रूप में शारिब हाशमी ने उम्दा काम किया है। शारिब ने वेब शो 'असुर' में भी अच्छा काम किया था। मुथु बने रविन्द्र विजय ने भी दर्शकों को अपने अभिनय से प्रभावित किया है।शरद केलकर ने क्यों इस सीरीज में काम किया पता नहीं। ९ एपिसोड में मुश्किल से वो २ - ३ बार ही दिखे हैं। पिछली बार ही कुछ ऐसा ही था। शरद से ज्यादा से तो इसमें श्रीकांत तिवारी की बेटी बनी धृति तिवारी ( अश्लेषा ठाकुर ) का काम है। अश्लेषा ने काम भी अच्छा किया है प्रियमणि, सीमा बिस्वास, दलीप ताहिल, दर्शन कुमार ,सनी हिंदुजा सभी ने अपना अपना काम बखूबी किया है।
निर्देशन--
राज एंड डीके ने "फॅमिली मैन - २ " को भी बहुत ही अच्छे तरीके से निर्देशित किया है। हाँ इस बार कुछ एपिसोड को निर्देशित करने का मौका संवाद लेखक सुपर्ण एस वर्मा को भी मिला है। जब यह शो प्रसारित हुआ था तब शो के शुरू में तमिल भाषा को समझने में थोड़ी परेशानी जरूर हुई थी लेकिन बाद में दर्शकों की परेशानी को देखते हुए हिंदी में भी सब टाइटल आ गये हैं जिससे अब दर्शकों को यह समस्या दूर हो गई है। कहीं कोई बोरियत नहीं होती इस सीरीज को देखने में। अगर आपने पिछला सीजन नहीं देखा तो उससे कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इस बार नया मिशन दिखाया गया है। लेकिन आप को पहला सीजन भी देखना चाहिए। शरू से आखिरी तक बिना किसी रूकावट के आप दोनों ही सीजन देखना पसंद करेंगे।
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