सोनी लिव पर प्रसारित वेब सीरीज "महारानी " की इन दिनों बहुत चर्चा है क्योंकि एक तो यह बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के राजनीति में आने की कहानी पर आधारित है। दूसरी राबड़ी देवी की भूमिका को अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने बहुत ही शानदार तरीके से अभिनीत किया है। हालाँकि कभी कभी बिहार की भाषा बोलने में सभी कलाकारों से थोड़ी चूक भी हुई है।
सुभाष कपूर द्वारा रची गयी और लिखी गयी "महारानी " को निर्देशित किया है करण शर्मा ने । सुभाष कपूर वहीं हैं जिन्होंने फंस गया रे ओबामा, जॉली एल एल बी २०१३ और जॉली एल एल बी २०१७ , मैडम चीफ मिनिस्टर आदि फिल्मों को लिखा और निर्देशित किया था। सुभाष ने फिल्म "मैडम चीफ मिनिस्टर" के बारें में भी यही कहा था कि यह फिल्म किसी राजनितिक व्यक्तित्व से मेल नहीं खाती जबकि जिसने भी यह फिल्म देखी सब समझ गये यह फिल्म उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्य मंत्री मायावती की जिंदगी पर आधारित थी। यही सब उन्होंने इस फिल्म के साथ भी किया है।
१० एपिसोड की इस सीरीज की शुरुआत होती है बिहार के मुख्य मंत्री भीमा भारती (सोहम शाह ) को गोली लगने से होती है। भीमा अपनी जगह अपनी अनपढ़ पत्नी रानी भारती ( हुमा कुरैशी ) को बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बैठा देते हैं। रानी को ठीक से बोलना भी नहीं आता। किस तरह हकलाते हुए वो पद की शपथ लेती है और दस्तखत की जगह अपना अंगूठा लगाती है। विपक्ष के नेता नवीन कुमार (अमित सयाल ) रानी का जीना मुश्किल करते हैं।
"महारानी " में बिहार की राजनीति के वो सभी रंग देखने को मिलेगें जोकि असली राजनीति में लोगों ने देखें और सुनें हैं। जिनकी बिहार के राजनीतिक इतिहास में रुचि है। उन्हें यह अवश्य पसंद आयेगी। इसमें जहां आर्थिक मुश्किलों और जातीय संघर्ष में फंसे राज्य की मुख्यमंत्री की कुर्सी की कहानी के साथ दलित-सवर्ण संघर्ष है। वहीं अपनों के और विरोधियों के षड्यंत्र हैं। अफसरों की चापलूसी और चालें हैं। विधानसभा में बहुमत और अल्पमत की सौदेबाजी है। नक्सल और पुलिस है। हत्याएं और सिस्टम के घोटाले हैं और सबसे ज्यादा लोकप्रिय चारा घोटाला भी है। "महारानी" में नेता पक्ष - विपक्ष तो क्या राजपाल भी पूरी तरह से भ्र्ष्ट दिखाया है।
१० एपिसोड है इस सीरीज के लेकिन फिर भी मन कहीं भटकता नहीं है। दर्शकों को पसंद आयेगी "महारानी। "

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