११ जून को ज़ी ५ पर प्रीमियर हुआ वेब सीरीज "सनफ्लॉवर" का। लेकिन इस सनफ्लॉवर की खुशबू ज्यादा दूर तक नहीं फैल पायी। जबकि उम्मीद थी कि इसकी महक दर्शकों के दिलो दिमाग पर छा जायेगी क्योंकि इससे जुड़े हैं लोकप्रिय अभिनेता सुनील ग्रोवर और विकास बहल। सुनील को हम सभी ने मशहूर गुलाटी , गुत्थी , रिंकू भाभी और भी कई किरदारों में देखा है और जहाँ तक विकास बहल की बात करें तो उन्होंने क्वीन और सुपर ३० जैसी फ़िल्में बनाई हैं। विकास बहल ने "सनफ्लॉवर" से ओ टी टी पर अपनी शुरुआत की है जबकि सुनील "तांडव" वेब सीरीज से अपनी शुरुआत कर चुके हैं। सुनील ग्रोवर के साथ - साथ इस सीरीज में रनवीर शौरी , गिरीश कुलकर्णी , आशीष विद्यार्थी , शोनाली नागरानी और सोनल झा हैं।
'सनफ्लॉवर' एक मर्डर मिस्ट्री है। मुंबई की एक सोसायटी है "सनफ्लॉवर" जिसमें एक हत्या हो जाती है। जिसकी जाँच पुलिस करती है।पुलिस सोसायटी वालों ,उसमें काम करने वालों से पूछताछ करती है। पुलिस की पूछताछ के साथ - साथ शो में यह भी दिखाया है कि किस तरह मुंबई की सोसायटी में घर लेने के लिए लोगो की सोसायटी के सामने इंटरव्यू देना पड़ता है अगर आप उनके सोच के मुताबिक़ खरे उतरते हैं तो आपको प्लैट मिल जायेगा नहीं तो आप अपना रास्ता नापें यानि समाज के ठेकेदार अपने हिसाब से यह तय करेगें कि कौन उनके साथ रह सकता है और कौन नहीं। फिल्म वाले, मॉडल , तलाकशुदा ,बैचलर को घर मिलना बहुत मुश्किल है। यह सब इसमें दिखाया है।
८ एपिसोड वाली इस वेब सीरीज के कुछ एपिसोड तो अच्छे लगते है देखने में लेकिन फिर बाद में कहानी कुछ भटक जाती है क्राइम - थ्रिलर से उबाऊ कहानी बन जाती है। सोनू सिंह बने सुनील ग्रोवर भी हास्य ही करने लगते हैं। सुनील ग्रोवर के किरदार को भोला-भाला मगर कामयाब सेल्समैन दिखाया गया है। हमेशा मुस्कुराता रहता है। ना गुस्सा करता है, ना विचलित होता है। चाहे जो हालात हों। सुनील ने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है।उनका किरदार ही ऐसा है कि सब कुछ होते हुए भी उनके पास कुछ भी नहीं है। उन्हें देखकर दर्शकों को हँसी ही आती है क्योंकि उन्होंने अपने किरदारों से दर्शकों को हँसाया ही है। हालाँकि "तांडव " में उनका किरदार अलग था। सुनील के किरदार को हम बुरा नहीं कह सकते क्योंकि उन्हें तो जैसा निर्देशक ने कहा वैसा अभिनीत कर दिया यहाँ कमी है लेखक की।
इंस्पेक्टर दिगेंद्र बने रणवीर शौरी , रंगीन मिज़ाज और हमेशा मोबाइल फोन को उंगलियों पर नचाने वाले इंस्पेक्टर तांबे के किरदार में गिरीश कुलकर्णी दोनों ने अच्छा काम किया है। इसके साथ काम वाली बाई ( अन्नपूर्णा ) आशीष विद्यार्थी और डॉ आहूजा (मुकुल चड्ढा ) का काम भी अच्छा है। राहुल सेनगुप्ता का निर्देशन भी ठीक ही है।
अभी "सनफ्लॉवर" की मर्डर मिस्ट्री सुलझी नहीं है देखते हैं कि दूसरा सीजन कब आयेगा।
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