सोमवार, 21 जून 2021

विद्या बालन के लिये शेरनी को देखें

हिंदी फिल्म -- शेरनी

रिलीज़ --  प्राइम विडियो 

बैनर -- टी सीरीज 

निर्माता -- भूषण कुमार , किशन कुमार 

निर्देशक -- अमित मसुरकर 

पटकथा और कहानी -- आस्था टिकू 

संवाद --  अमित मसुरकर और यशस्वी मिश्रा   

कलाकार --  विद्या बालन,विजय राज,शरत सक्‍सेना,बृजेंद्र काला,नीरज काबी


फिल्म "शेरनी "  की कहानी है  एक वन विभाग की अफसर की है। जिसे नौ साल से कोई भी प्रमोशन नहीं मिला है।छह साल तक डेस्क पर काम करने के बाद आख‍िरकार बिजासपुर के जंगलों में उसे फील्‍ड जॉब मिली है। जहाँ उसकी पोस्टिंग हुई है वहाँ पास के गाँव में एक शेरनी का आंतक छाया हुआ है जिससे गाहे - बगाहे गाँव के लोगो की जाने जा रही हैं। अब उस अफसर के राह में बहुत सारी परेशानियाँ हैं एक ओर वो गाँव वालों को बचाना चाहती है तो दूसरी ओर वो शेरनी को भी बचाना चाहती है। जबकि इसी बीच चुनाव भी हैं और राजनितिक पार्टियाँ इस शेरनी को भी अपना मुद्दा बनाकर वोट मांग रही हैं। अपने सीनियरों और एक शिकारी आदि  से भी वो अफसर जूझ रही है। 
 २ घण्टा १० मिनट की अवधि की यह फिल्म १८ जून को प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई है। विद्या बालन की पिछली फिल्म "शकुन्तला देवी " भी २०२० में प्राइम वीडियो पर ही रिलीज़ हुई थी। विद्या ने ( विद्या विंसेंट ) फारेस्ट अफसर के रूप में शानदार अभिनय किया है। न्यूटन फेम निर्देशक अमित मसुरकर ने इस फिल्म को भी बहुत ही खूबसूरती के साथ बनाया है। हाँ कभी - कभी यह फिल्म वृतचित्र जैसी लगती है। लेकिन फिर भी रोमांच बना रहता है,  उत्सुकता बनी रहती है कि क्या शेरनी को बचाने में कामयाब होगी फारेस्ट अफसर विद्या क्योंकि सारा महकमा तो चाहता है कि किसी भी तरह से  टी १२ शेरनी को  जान से मार दिया जाये जबकि विद्या और उसके कुछ साथी चाहते हैं कि किसी भी तरह शेरनी को बचा कर जंगल पँहुचा दिया जाये।  हालाँकि कुछ द्रश्य ऐसे हैं जिनकी फिल्म में जरूरत नहीं थी। फिल्म में जैसे -- जैसे शेरनी की तलाश शरू होती है ऐसा लगा है कि हम भी किसी जंगल सफारी में यात्रा कर रहे हैं। फिल्म के कई संवाद भी बहुत ही लाजवाब और सच्चाई से जुड़े हुए हुए हैं।  विद्या के बॉस बंसल की भूमिका में बृजेन्द्र काला ने  अच्छा काम किया है। इसी तरह प्रोफेसर हसन नूरानी (विजय राज) , सीनियर अध‍िकारी नांगिया (नीरज काबी)  शिकारी पिंटू भैया (शरत सक्सेना ) ने अच्छा अभिनय किया है। सिनेमेटोग्राफर राकेश हरिदास के कैमरे ने कमाल का काम किया है। अनीश जॉन का साउंड डिजाइन भी उम्दा है। इस फिल्म में एक नहीं बल्कि २ शेरनी हैं जिन्हे दर्शकों को अवश्य ही देखना चाहिए।  इस फ़िल्म को दर्शक विद्या बालन की वजह से पसन्द करेंगे।  

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