रविवार, 18 जुलाई 2021
हौसलें और संघर्ष की कहानी तूफ़ान
बुधवार, 7 जुलाई 2021
सस्ते उपन्यास की हसीन दिलरुबा
दिल्ली की रहने वाली रानी कश्यप (तापसी पन्नू ) एक आधुनिक लड़की है। उसे लेखक दिनेश पंडित के एक्शन और थ्रिलर उपन्यास पढ़ना बहुत पसंद है। उपन्यासों की तरह ही उसे अपनी जिंदगी में भी भरपूर रोमांस और रोमांच चाहिये। जबकि उसकी शादी एक सीधे सादे से ऋषभ सक्सेना ( विक्रांत मैसी ) से हो जाती है, जो कि ज्वालापुर के बिजली विभाग में इंजीनियर है जिसकी जिंदगी बहुत ही साधारण है लेकिन रानी को अपने पति से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें हैं। उनकी शादी हुए कुछ अरसा ही हुआ है तभी उनके घर में ऋषभ का कजिन नील (हर्षवर्धन राणे) आता है। नील देखने में आकर्षक है। बस रानी नील की तरफ आकर्षित हो जाती है और दोनों के बीच शारीरिक सम्बन्ध बन जाते हैं या यूँ कहें तो रानी को नील से प्यार हो जाता है जबकि नील तो बस अपनी इच्छाओं को पूरा कर रहा था। रानी जिसे चाय भी बनानी नहीं आती ऐसे में प्यार में अंधी वो नील के लिए नॉन वेज खाना भी यू ट्यूब देख कर बनाती है। रानी नील के साथ अपनी जिंदगी के सपने देखने लगती है। जबकि नील मौका देखकर चुपचाप रानी को बिना बताये ज्वालापुर से चला जाता है, या यूँ कहें भाग जाता है।
फ़िल्म क्यों देखें ?
बुधवार, 30 जून 2021
दंगों का ग्रहण
वेब सीरीज -- ग्रहण
ओ टी टी --डिज़्नी हॉट स्टार
निर्देशन -- राजन चंदेल
लेखक सत्य व्यास के उपन्यास "चौरासी " पर आधारित
लेखक --अनु सिंह चौधरी, नवजोत गुलाटी, विभा सिंह, प्रतीक पयोधी, रंजन चंदेल व शैलेंद्र कुमार झा
कलाकार -- जोया हुसैन , पवन मल्होत्रा , अंशुमान पुष्कर , वमिका गब्बी , टीकम जोशी, सहीदुर रहमान आदि।
डिज्नी हॉट स्टार पर प्रसारित वेब सीरीज "ग्रहण " लेखक सत्य व्यास की किताब "चौरासी " पर आधारित है। २०१८ में आयी किताब "चौरासी" १९८४ में हुए दंगों पर आधारित है। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को उनके ही एक सिख अंगरक्षक ने गोली मार कर हत्या कर दी थी उसके बाद देश में जो दंगे हुए उसी को के इर्द गिर्द कहानी है इस शो "ग्रहण " की।
कहानी --- दो अलग शहर और दो अलग समय की कहानी है। दोनो कहानी एक साथ चलती हैं। एक कहानी २०१६ राँची में है तो दूसरी १९८४ में बोकारो में दिखायी है। झारखंड में चुनाव होने वाले हैं तो ऐसे में मुख्यमंत्री अपने वोटों के लिए १९९४ में हुए दंगों की पुन : जाँच कराने के लिए एक कमेटी बैठाते हैं जिसका जिम्मा एस पी अमृता सिंह को सौपां जाता है। जाँच के दौरान इन दंगों में अमृता को अपने पिता के शामिल होने के बारें में पता चलता है जो किसी समय ऋषि रंजन थे जबकि अब वो गुरसेवक नाम के सिख बने हुए हैं। क्या है इस सब के पीछे का रहस्य ?इसकी गुत्थी भी सुलझाने में लगी है अमृता। जबकि इसी बीच उसके पिता १९८४ के दंगों का गुनाहगार खुद को मान कर समर्पण कर देते हैं। अमृता पूरी तरह से अपनी ड्यूटी में लगी हुई है। अपने पिता से नाराज भी है कि क्यों उसे इस सच्चाई का पता नहीं है। क्या होता है ? कैसे होता है ? कौन है असली गुनाहगार ? यही सब दिखाया है इसमें।
८ एपिसोड वाली यह सीरीज दर्शकों को निस्संदेह रूप से पसंद आयेगी क्योंकि इसमें वो सब है जो कि दर्शक देखना चाहते हैं यानि इसमें ऋषि और मनु के बीच बहुत ही खूबसूरत प्रेम कहानी है ,पुरानी फिल्मो की बाते हैं, दंगे हैं और राजनीति है। एक साथ बिना रुके दर्शक इस सीरीज को देख सकते हैं लेकिन बीच - बीच में राजनीति देखकर मन बहुत खराब होता है। जो लोग एक साथ बैठ कर हँसते बोलते हैं वो कैसे किसी के बरगलाने से दूसरे को जान से मारने पर आमादा हो जाते हैं और फिर जब कुछ समझ में आता है तब पछताने के अलावा इंसान कुछ नहीं कर सकता। एक - दो एपिसोड कुछ धीमें हैं लेकिन फिर भी दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब है "ग्रहण "
निर्देशन -- राजन चंदेल ने अच्छा निर्देशक किया है। राजन ने एक लेखक और सहायक के रूप अनुराग कश्यप के साथ काम किया है तो उन्हें दर्शकों को कैसे बांधे रखना है यह कला आती है। शो में ऋषि की किरदार अभिनीत किया है "जामताड़ा " फेम अंशुमान पुष्कर ने अच्छा काम किया है। मनु की भूमिका में हैं वमिका गब्बी, अच्छी लगी हैं , उन्होंने इससे पहले दिल दिया गल्लां , सिक्सटीन और लव आज कल में अभिनय किया है। अमृता की भूमिका अभिनीत की है मुक्काबाज फेम जोया हुसैन ने , अच्छा अभिनय है। टी वी अभिनेता नंदिश सिंह संधू भी हैं इसमें ,लेकिन उनके हिस्से बहुत ही कम काम आया है। अभिनेता पवन मल्होत्रा ने बुजुर्ग ऋषि यानि अमृता के पिता की भूमिका अभिनीत की है। हमेशा की तरह उन्होंने बहुत ही उम्दा किया है उन्हें देखना हमेशा ही अच्छा लगता है। इस सीरीज में गीत भी है जो मधुर हैं। सब कुछ अच्छा है , लेकिन इसका नाम ग्रहण क्यों रखा समझ नहीं आया।
रविवार, 27 जून 2021
भरपूर एक्शन और रोमांच दर्शकों को देखने को मिलेगा फैमिली मैन 2 में
सोमवार, 21 जून 2021
विद्या बालन के लिये शेरनी को देखें
सोमवार, 14 जून 2021
सनफ्लॉवर की खुशबू ज्यादा दूर तक नहीं फैल पायी
११ जून को ज़ी ५ पर प्रीमियर हुआ वेब सीरीज "सनफ्लॉवर" का। लेकिन इस सनफ्लॉवर की खुशबू ज्यादा दूर तक नहीं फैल पायी। जबकि उम्मीद थी कि इसकी महक दर्शकों के दिलो दिमाग पर छा जायेगी क्योंकि इससे जुड़े हैं लोकप्रिय अभिनेता सुनील ग्रोवर और विकास बहल। सुनील को हम सभी ने मशहूर गुलाटी , गुत्थी , रिंकू भाभी और भी कई किरदारों में देखा है और जहाँ तक विकास बहल की बात करें तो उन्होंने क्वीन और सुपर ३० जैसी फ़िल्में बनाई हैं। विकास बहल ने "सनफ्लॉवर" से ओ टी टी पर अपनी शुरुआत की है जबकि सुनील "तांडव" वेब सीरीज से अपनी शुरुआत कर चुके हैं। सुनील ग्रोवर के साथ - साथ इस सीरीज में रनवीर शौरी , गिरीश कुलकर्णी , आशीष विद्यार्थी , शोनाली नागरानी और सोनल झा हैं।
'सनफ्लॉवर' एक मर्डर मिस्ट्री है। मुंबई की एक सोसायटी है "सनफ्लॉवर" जिसमें एक हत्या हो जाती है। जिसकी जाँच पुलिस करती है।पुलिस सोसायटी वालों ,उसमें काम करने वालों से पूछताछ करती है। पुलिस की पूछताछ के साथ - साथ शो में यह भी दिखाया है कि किस तरह मुंबई की सोसायटी में घर लेने के लिए लोगो की सोसायटी के सामने इंटरव्यू देना पड़ता है अगर आप उनके सोच के मुताबिक़ खरे उतरते हैं तो आपको प्लैट मिल जायेगा नहीं तो आप अपना रास्ता नापें यानि समाज के ठेकेदार अपने हिसाब से यह तय करेगें कि कौन उनके साथ रह सकता है और कौन नहीं। फिल्म वाले, मॉडल , तलाकशुदा ,बैचलर को घर मिलना बहुत मुश्किल है। यह सब इसमें दिखाया है।
८ एपिसोड वाली इस वेब सीरीज के कुछ एपिसोड तो अच्छे लगते है देखने में लेकिन फिर बाद में कहानी कुछ भटक जाती है क्राइम - थ्रिलर से उबाऊ कहानी बन जाती है। सोनू सिंह बने सुनील ग्रोवर भी हास्य ही करने लगते हैं। सुनील ग्रोवर के किरदार को भोला-भाला मगर कामयाब सेल्समैन दिखाया गया है। हमेशा मुस्कुराता रहता है। ना गुस्सा करता है, ना विचलित होता है। चाहे जो हालात हों। सुनील ने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है।उनका किरदार ही ऐसा है कि सब कुछ होते हुए भी उनके पास कुछ भी नहीं है। उन्हें देखकर दर्शकों को हँसी ही आती है क्योंकि उन्होंने अपने किरदारों से दर्शकों को हँसाया ही है। हालाँकि "तांडव " में उनका किरदार अलग था। सुनील के किरदार को हम बुरा नहीं कह सकते क्योंकि उन्हें तो जैसा निर्देशक ने कहा वैसा अभिनीत कर दिया यहाँ कमी है लेखक की।
इंस्पेक्टर दिगेंद्र बने रणवीर शौरी , रंगीन मिज़ाज और हमेशा मोबाइल फोन को उंगलियों पर नचाने वाले इंस्पेक्टर तांबे के किरदार में गिरीश कुलकर्णी दोनों ने अच्छा काम किया है। इसके साथ काम वाली बाई ( अन्नपूर्णा ) आशीष विद्यार्थी और डॉ आहूजा (मुकुल चड्ढा ) का काम भी अच्छा है। राहुल सेनगुप्ता का निर्देशन भी ठीक ही है।
अभी "सनफ्लॉवर" की मर्डर मिस्ट्री सुलझी नहीं है देखते हैं कि दूसरा सीजन कब आयेगा।
बुधवार, 9 जून 2021
दर्शकों को पसंद आयेगी "महारानी। "
सोनी लिव पर प्रसारित वेब सीरीज "महारानी " की इन दिनों बहुत चर्चा है क्योंकि एक तो यह बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के राजनीति में आने की कहानी पर आधारित है। दूसरी राबड़ी देवी की भूमिका को अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने बहुत ही शानदार तरीके से अभिनीत किया है। हालाँकि कभी कभी बिहार की भाषा बोलने में सभी कलाकारों से थोड़ी चूक भी हुई है।
१० एपिसोड की इस सीरीज की शुरुआत होती है बिहार के मुख्य मंत्री भीमा भारती (सोहम शाह ) को गोली लगने से होती है। भीमा अपनी जगह अपनी अनपढ़ पत्नी रानी भारती ( हुमा कुरैशी ) को बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बैठा देते हैं। रानी को ठीक से बोलना भी नहीं आता। किस तरह हकलाते हुए वो पद की शपथ लेती है और दस्तखत की जगह अपना अंगूठा लगाती है। विपक्ष के नेता नवीन कुमार (अमित सयाल ) रानी का जीना मुश्किल करते हैं।
"महारानी " में बिहार की राजनीति के वो सभी रंग देखने को मिलेगें जोकि असली राजनीति में लोगों ने देखें और सुनें हैं। जिनकी बिहार के राजनीतिक इतिहास में रुचि है। उन्हें यह अवश्य पसंद आयेगी। इसमें जहां आर्थिक मुश्किलों और जातीय संघर्ष में फंसे राज्य की मुख्यमंत्री की कुर्सी की कहानी के साथ दलित-सवर्ण संघर्ष है। वहीं अपनों के और विरोधियों के षड्यंत्र हैं। अफसरों की चापलूसी और चालें हैं। विधानसभा में बहुमत और अल्पमत की सौदेबाजी है। नक्सल और पुलिस है। हत्याएं और सिस्टम के घोटाले हैं और सबसे ज्यादा लोकप्रिय चारा घोटाला भी है। "महारानी" में नेता पक्ष - विपक्ष तो क्या राजपाल भी पूरी तरह से भ्र्ष्ट दिखाया है।
बुधवार, 26 मई 2021
ओ टी टी पर छाई परिणीति चोपड़ा
मंगलवार, 25 मई 2021
दर्शकों को पसंद आयेगा ऑउट ऑफ़ लव - २
पूरब कोहली और रसिका दुग्गल अभिनीत डिज़्नी प्लस हॉटस्टार की चर्चित सीरीज़ "आउट ऑफ़ लव" अपने दूसरे सीज़न के ५ एपिसोड के साथ एक बार फिर दर्शकों के सामने है। पहला सीजन २०१९ में नवम्बर में आया था और दूसरा सीजन २०२१ के अप्रैल -- मई महीने में आया है। पहला सीजन भी दर्शकों ने खासा पसंद किया था और निस्संदेह दूसरा भी पसंद करेगें। ब्रिटिश रोमांटिक-थ्रिलर सीरीज़ डॉक्टर फॉस्टर पर आधारित इस शो के पहले सीजन को निर्देशक किया था तिग्मांशु धूलिया और ऐजाज़ खान ने जबकि दूसरे सीजन के निर्देशक हैं लोकप्रिय अनिरुद्ध सेन। कलाकारों में कोई बदलाव नहीं किया है। पूरब कोहली और रसिका दुग्गल ने सशक्त अभिनय से दर्शकों का पूरा मनोरंजन किया है। "आउट ऑफ़ लव" के दूसरे सीजन में शुरू के दो एपिसोड ३० अप्रैल को प्रसारित हुए जबकि बाकी हर सप्ताह में प्रसारित किये गये हैं।
गुरुवार, 1 अप्रैल 2021
समीक्षा -- हिंदी फिल्म --पगलैट
समीक्षा -- हिंदी फिल्म --पगलैट
मंगलवार, 19 जनवरी 2021
फिल्म "कागज़ " में कुछ अगर कुछ देखने लायक है तो वो हैं पंकज त्रिपाठी
रिलीज़ --- ज़ी ५ पर
लेखन और निर्देशन -- सतीश कौशिक
निर्माता -- सलमान खान , निशांत कौशिक , विकास मालू
कलाकार -- पंकज त्रिपाठी , मोनल गज्जर ,सतीश कौशिक
संगीत -- प्रवेश मल्लिक , राहुल जैन
कागज़ की अहमियत हमारे जीवन में क्या है ? यह बात हमें तब पता चलती है जब हम सरकारी काम से किसी दफ्तर में जाते हैं। अगर सरकारी कागजो में जीवित इंसान भी मरा हुआ दिखाई दे तो सोचिये उस व्यक्ति के जीवन में कितना उथल - पुथल होगा। यह फिल्म "कागज़" भी एक सच्ची कहानी पर आधारित है। यह कहानी है उस लाल बिहारी मृतक नाम के व्यक्ति की। जिसने 18 साल के लंबे संघर्ष के बाद खुद को जीवित साबित किया।
सोमवार, 11 जनवरी 2021
कैसे एक कलाकार और एक निर्देशक एक दूसरे की बेइज्जती करते हैं यह देखना हो तो यह फिल्म अवश्य देखें -- "एके वर्सेज एके"
"एके वर्सेज एके" यह फिल्म नेट फ्लिक्स पर रिलीज़ हो चुकी है। इस फिल्म की ख़ास बात यह है कि इस फिल्म में हर किसी ने अपना असली किरदार अभिनीत किया है यानि अनिल कपूर अनिल कपूर ही बने हैं और निर्देशक अनुराग कश्यप निर्देशक अनुराग कश्यप ही बने हैं। फिल्म के अंदर एक फिल्म जो चल रही है उसकी कहानी है अभिनेता अनिल कपूर की। कई साल पहले निर्देशक अनुराग कश्यप अभिनेता अनिल कपूर को लेकर एक फिल्म "आल्विन कालीचरण " बनाना चाहते थे लेकिन अनिल कपूर की वजह से उनकी यह फिल्म बन नहीं सकी क्योंकि अनिल कपूर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे , तो इसका बदला लेने के लिये वो अनिल कपूर की बेटी अभिनेत्री सोनम कपूर का अपहरण कर लेते हैं अब अनिल कपूर के पास १० घंटे का वक्त का है अपनी बेटी को ढूँढने का। अब अनिल कपूर अपनी बेटी को बौखलाये सब जगह ढूँढ़ते हैं वो सब अनुराग की सहायक योगिता सब अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर रही है।
समीक्षा -- यह अलग तरह की फिल्म है यानि फिल्म में सब कुछ वास्तविक है। इस तरह की फ़िल्में आम तौर पर हमारे यहाँ नहीं बनती ,तो कह सकते हैं कि अलग तरह का एक प्रयोग है फिल्म बनाने का। लेकिन फिल्म देखने में जरा भी मज़ा नहीं आता। कुछ अगर अच्छा है फिल्म में तो वो हैं अनिल कपूर। उन्हें हर फ्रेम में देखना अच्छा लगता है। अनुराग कश्यप भी ठीक ही लगे हैं। अनिल के बेटे हर्षवर्धन ने बहुत ही बुरा अभिनय किया है। उन्हें बस गाली देने के लिए ही लाया गया है फिल्म में। सोनम कपूर का कुछ काम नहीं था फिल्म मे। कैसे एक कलाकार और एक निर्देशक एक दूसरे की बेइज्जती करते हैं यह देखना हो तो यह फिल्म अवश्य देखें।





